तुन्द तेवर आज ख़ावर के भी आओ देख लें

तुन्द तेवर आज ख़ावर के भी आओ देख लें
कुछ नज़ारे रोज़ ए महशर के भी आओ देख लें

झूट की थोड़ी सी आमेज़िश तो है इस में मगर
उस की बातों पर यक़ीं कर के भी आओ देख लें

अपनी हिम्मत पर बहोत हम को भरोसा है मगर
हौसले कितने हैं ख़ंजर के भी, आओ देख लें

बेनियाज़ी तो बहुत देखी है यज़दां की मगर
अब करम थोड़े से पत्थर के भी आओ देख लें

है हमारे बिन बहुत ग़मगीन ये सुनते तो हैं
घर चलें, आंसू ज़रा घर के भी आओ देख लें

वहशतें, तल्ख़ी, नदामत, इम्तेहाँ, नाकामियाँ
जी के अब जी भर गया, मर के भी आओ देख लें

ज़ख्म से "मुमताज़" मिलती है बलंदी किस तरह
मो'जिज़े कुछ अपने शहपर के भी आओ देख लें


तुन्द-बिगड़े हुए, ख़ावर-सूरज, रोज़ ए महशर-प्रलय का दिन, आमेज़िश-मिलावट, बेनियाज़ी-बेपरवाही, यज़दां-अल्लाह, ग़मगीन-दुखी, वहशतें-बेचैनियाँ, तल्ख़ी-कड़वाहट, नदामत-शर्मिंदगी, मो'जिज़े-चमत्कार  

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