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Showing posts from December 19, 2018

फिर जाग उठा जूनून, फिर अरमाँ मचल गए

फिरजागउठाजूनून, फिरअरमाँमचलगए हमफिरसफ़रकेशौक़मेंघरसेनिकलगए
मुस्तक़बिलों1केख़्वाबमेंहममहव2थेअभी औरज़िन्दगीकेहाथसेलम्हेफिसलगए
आसाँकहाँथाक़ैदएतअल्लुक़सेछूटना वोमुस्करादिया,किइरादेबहलगए
शायदबिखरहीजातीमेरीज़ातजाबजा3 अच्छाहुआकेवक़्तसेपहलेसंभलगए
सूरजसेजंगकरनेकीनादानीकीहीक्यूँ अबक्याउड़ेजूनून,किजबपरहीजलगए