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Showing posts from November 27, 2018

ज़ख़्म महरूमी का भरने से रहा

ज़ख़्ममहरूमीकाभरनेसेरहा "कर्बकासूरजबिखरनेसेरहा"
ज़ीस्तहीगुज़रेतोअबगुज़रेमियाँ वोहसींपलतोगुज़रनेसेरहा
खेलतेआएहैंहमभीजानपर मुश्किलोंसेदिलतोडरनेसेरहा
फ़ैसलाहमहीकोईकरलेंचलो वोतोयेएहसानकरनेसेरहा
पलख़ुशीकेपरलगाकरउड़गए वक़्तहीठहरा, ठहरनेसेरहा
हैग़नीमतलम्हाभरकीभीख़ुशी अबमुक़द्दरतोसँवरनेसेरहा
जोशकीगर्मीसेपिघलेगाक़फ़स