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Showing posts from January 12, 2019

वो निस्बतें, वो रग़बतें, वो क़ुरबतें कहाँ गईं

वो निस्बतें, वो रग़बतें, वो क़ुरबतें कहाँ गईं दिलों में जो मक़ीम थीं, हरारतें कहाँ गईं
तराश डाला मसलेहत ने ज़हन-ओ-दिल का फ़लसफा बदलती थीं जो पल ब पल तबीअतें, कहाँ गईं
जदीदियत की जंग में वो भोलापन भी खो गया वो बचपना, वो शोख़ी, वो शरारतें कहाँ गईं
फ़ना हुईं वो यारियाँ, वो रस्म ओ राह अब कहाँ वो सीधी सादी ज़िन्दगी, वो फ़ुरसतें कहाँ गईं
शिकस्त खा के आज क्यूँ बिखर गए हैं हौसले उम्मीदें फ़ौत क्यूँ हुईं, वो हसरतें कहाँ गईं
बदलता वक़्त खेल का मिज़ाज भी बदल गया वो