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वो दिन याद करो (WO DIN YAAD KARO)

ग़म-ए-दुनिया के हर इक काम से मोहलत ले कर
कभी फ़ुरसत में जो बैठो तो वो दिन याद करो

GHAM E DUNIYA KE HAR IK KAAM SE MOHLAT LE KAR
KABHI FURSAT MEN JO BAITHO TO WO DIN YAAD KARO

वो लड़कपन का ज़माना, वो सहेली, साथी
साथ मिल कर जो बुझाई वो पहेली साथी
कितने मासूम थे दिन, कितने सुनहरे सपने
छोटी छोटी सी ख़ुशी, छोटे से ग़म थे अपने
वो खिलौनों की क़तारें, वो हर इक बात में खेल
वो ज़रा देर में लड़ना, वो ज़रा देर में मेल

WO LADAKPAN KA ZAMANA WO SAHELI SAATHI
SAATH MIL KAR JO BUJHAAI WO PAHELI SAATHI
KITNE MAASOOM THE DIN KITNE SUNAHRE SAPNE
CHHOTI CHHOTI SI KHUSHI CHHOTE SE GHAM THE APNE
WO KHILONON KI QATAAREN WO HAR IK BAAT MEN KHEL
WO ZARA DER MEN LADNA WO ZARA DER MEN MEL

रतजगे गर्म सी रातों के, वो छत का बिस्तर
छेड़ देना वो तेरा तार-ए-मोहब्बत अक्सर
कभी रंगीन इशारे तो कभी सरगोशी
कभी जलती हुई ख़्वाहिश वो कभी मदहोशी

RATJAGE GARM SI RAATON KE WO CHHAT KA BISTAR
CHHED DENA WO TERA TAAR E MOHABBAT AKSAR
KABHI RANGEEN ISHAARE WO KABHI SARGOSHI
KABHI JALTI HUI KHWAAHISH WO KABHI MADHOSHI

जब तेरा अक्स किताबों मे न…