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Showing posts from November 24, 2018

नूर अपना मेरी हस्ती में ज़रा हल कर दे

नूरअपनामेरीहस्तीमेंज़राहलकरदे इकज़राहाथलगादे, मुझेसंदलकरदे
ज़ेर-ओ-बमराहकेचलनेनहींदेतेमुझको तूजोचाहेतोहरइकराहकोसमतलकरदे
यूँतोहरवक़्तचुभाकरतीहैइकयादमुझे शामआएतोमुझेऔरभीबेकलकरदे
तेरेशायान-ए-ख़ुदाईहोंअताएँतेरी सारीमहरूमीकोयारबतूमुकफ़्फ़लकरदे
ज़ुल्मकी, यासकी, बदबख्ती की, महरूमीकी "सारीदुनियाकोमेरीआँखोंसेओझलकरदे"
अबन"मुमताज़" अधूरीरहेहसरतकोई