संदेश

March 16, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सूनामी (TSUNAMI) (2011 में जापान में आई भयंकर सूनामी की खबर पढ़ कर ये नज़्म कही थी)

उठा वो क़हर मौजों का जो धरती की तरफ़ दौड़ा क़यामतख़ेज़ मौजों ने हर इक दीवार को तोड़ा लरज़ उट्ठी ज़मीं, हर ओर इक हंगाम तारी है बरहना मौत का ये रक़्स चारों सिम्त जारी है UTHA WO QEHR MAUJON KA JO DHARTI KI TARAF DAUDA QAYAMAT KHEZ MAUJON NE HAR IK DEEWAR KO TODA LARAZ UTTHI ZAMEEN HAR OR IK HANGAAM TAARI HAI BARAHNA MAUT KA YE RAQS CHAARON SIMT JAARI HAI
तमाशा मौत का, रक़्स-ए-ज़मीं, मौजों का हंगामा ये क़ुदरत का ग़ज़ब, ये डूबती लाशों का हंगामा ये जलते घर के घर, जलती हुई ये शहर की राहें क़यामत का रिएक्टर, ये ख़ुदा के क़हर की राहें ये ज़हन-ए-आदमी में छाई ज़ुल्मत का नतीजा हैं ये इंसाँ के ख़ुदा बनने की चाहत का नतीजा हैं TAMASHA MAUT KA, RAQS E ZAMEEN, MAUJON KA HANGAAMA YE QUDRAT KA GHAZAB YE DOOBTI LAASHON KA HANGAAMA YE JALTE GHAR KE GHAR JALTI HUI YE SHEHR KI RAAHEN QAYAMAT KA REACTOR YEKHUDA KE QEHR KI RAAHEN YE ZEHN E AADMI MEN CHHAI ZULMAT KA NATEEJA HAIN YE INSAAN KE KHUDA BAN NE KI CHAAHAT KA NATEEJA HAIN
यहाँ सब कोशिशें नाकाम हैं, उम्मीद बेकस है कि इंसाँ देख लो क़ुदरत के आगे कितना बेबस है ज़मीं की एक ही लग़्ज़िश ने वो…

ग़ज़ल - कौन है तू मेरा, क्या तुझ से मेरा रिश्ता है

कौन है तू मेरा, क्या तुझ से मेरा रिश्ता है अजनबी हो के भी अपना सा मुझे लगता है KAUN HAI TU MERA, KYA MUJH SE TERA RISHTA HAI AJNABEE HO KE BHI APNA SA MUJHE LAGATA HAI
एक एहसास मुझे महव किए रहता है इक ख़यालों के समंदर में ये दिल डूबा है EK EHSAAS MUJHE MEHV KIYE REHTA HAI IK KHAYAALON KE SAMANDAR MEN YE DIL DOOBA HAI
है तलबगार समंदर की मेरी तश्नालबी होंठ तो होंठ, मेरी रूह तलक तश्ना है HAI TALABGAAR SAMANDAR KI MERI TASHNALABI HONT TO HONT MERI ROOH TALAK TASHNA HAI
इस उजाले ने तो बीनाई ही ले ली मेरी मैं ने सदियों से उजाला जो नहीं देखा है IS UJAALE NE TO BEENAAI HI LE LI MERI MAIN NE SADIYON SE UJAALA JO NAHIN DEKHA HAI
कैसा आसेब मेरे दिल को लगा है अबके कैसा जादू है, अजब दिल पे नशा छाया है KAISA AASEB MERE DIL KO LAGA HAI AB KE KAISA JAADU HAI, AJAB DIL PE NASHA CHHAYA HAI
एक एहसास जो लिपटा है मेरी रूह के साथ मेरी हस्ती से मुझे दूर लिए जाता है EK EHSSAS JO LIPTA HAI MERI ROOH KE SAATH MERIHASTISEMUJHEDOORLIYEJAATAHAI
आज “मुमताज़” ने डाली है हवाओं पे कमंद पैरहन जिस्म का तख़ईल को पहनाया है AAJ 'MUMTA…