Posts

Showing posts from January 8, 2019

ज़ालिम के दिल को भी शाद नहीं करते

ज़ालिम के दिल को भी शाद नहीं करते मिट जाते हैं, हम फ़रियाद नहीं करते
चेहरा कुछ कहता है, लब कुछ कहते हैं शायद वो दिल से इरशादनहींकरते
आ पहुंचे हैं शहर-ए-ख़ुशी में उकता कर अब वीरानेहमआबादनहींकरते
हर मौक़े पर गोहर लुटाना क्या मानी अश्कों को यूं ही बरबादनहींकरते
हर हसरत का नाहक़ खूनबहाडालें इतनी भी अब हम बेदादनहींकरते
देते हैं दिल, लेकिन खूबसहूलतसे अब तो कोहकनी फरहाद नहींकरते
ज़हर खुले ज़ख्मों में बनने लगताहै "हम गुज़रे लम्हों को याद नहीं करते"
बरसों रौंदे जातेहैं,तबउठतेहैं यूँ