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March 18, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ग़ज़ल - चार सू तारीकियाँ, सब हसरतें वीरान हैं

चार सू तारीकियाँ, सब हसरतें वीरान हैं जिस्म के अंधे नगर के रास्ते सुनसान हैं chaar soo taarikiyan sab hasraten veeraan hain jism ke andhe nagar ke raaste sunsaan hain
जीत जाते हम मगर तलवार हम ने फेंक दी ख़ुद ही हम अपनी शिकस्त-ए-ज़ात का ऐलान हैं Jeetjaatehammagartalwarhamnephenkdi khud hi ham apni shikast e zaat ka ailaan hain
चार क़दमों पर है मंज़िल, अब तुझे ये क्या हुआ क्यूँ नज़र धुँधला गई है, क्यूँ ख़ता औसान हैं chaar qadmon par hai manzil ab tujhe ye kya hua kyun nazar dhundla gai hai kyun khata ausaan hain
आरज़ू, रिश्ते, मोहब्बत, रंज-ओ-ग़म, एहसास, ख़्वाब इस किताब-ए-ज़िन्दगी के कितने ही उनवान हैं aarzoo rishte mohabbat ranj o gham ehsaas khwaab is kitaab e zindagi ke kitne hi unwaan hain
कैसी साहिर है ये हसरत, कैसा ये एहसास है वो उधर हैरतज़दा हैं, हम इधर हैरान हैं kaisi saahir hai ye hasrat kaisa ye ehsaas hai wo udhar hairatzada hain ham idhar hairaan hain
फिर तसव्वर उड़ चला, तख़ईल फिर आज़ाद है बिखरी ज़ंजीरें हैं और ख़ाली पड़े ज़िंदान हैं phir tasawwar ud chala takheel phir aazad hai bikhri zanjeeren hain aur …