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ग़ज़ल - कभी तक़दीर ने लूटा, कभी वहशत ने ठुकराया

कभी तक़दीर ने लूटा, कभी वहशत ने ठुकराया
हज़ारों कोशिशें कर लीं हमें जीना न रास आया
KABHI TAQDEER NE LOOTA KABHI WAHSHAT NE THUKRAAYA
HAZAARON KOSHISHEN KAR LEEN HAMEN JEENA NA RAAS AAYA

वही, जिसके लिए हमने वजूद अपना मिटा डाला
उसी ने दर्द-ए-लाफ़ानी का तोहफ़ा हमको लौटाया
WAHI JIS KE LIYE HAM NE WAJOOD APNA MITA DAALAA
USI NE DARD E LAAFAANI KA TOHFAA HAM KO LAUTAAYA

खड़े हैं दर्द के साहिल पे और ये सोचते हैं हम
सफ़र का शौक़ किस मंज़िल पे हमको आज ले आया
KHADE HAIN DARD KE SAAHIL PE AUR YE SOCHTE HAIN HAM
SAFAR KA SHAUQ KIS MANZIL PE HAM KO AAJ LE AAYA

चली पुरवाई तो दिल की सभी चोटें उभर आईं
मगर इक याद ने दिल के सभी छालों को सहलाया
CHALI PURWAAI TO DIL KI SABHI CHOTEN UBHAR AAIN
MAGAR IK YAAD NE DIL KE SABHI CHHAALON KO SAHLAAYA

हद-ए-बीनाई तक तन्हाई है, वहशत है, ज़ुल्मत है
मोहब्बत ने हमें ये आज किस मंज़िल पे पहुंचाया
HAD E BEENAAI TAK TANHAAI HAI WAHSHAT HAI ZULMAT HAI
MOHABBAT NE HAMEN YE AAJ KIS MANZIL PE PAHUNCHAAYA

ये आलम नफ़्सा-नफ़्सी का, मसाइल अपने काफ़ी हैं
ये सोचे कौन ऐसे में कि क्या भूखा है हम…

ग़ज़ल - जब निगाहों में कोई मंज़र पुराना आ गया

जब निगाहों में कोई मंज़र पुराना आ गया
याद हमको भूला बिसरा हर फ़साना आ गया
JAB NIGAAHON MEN KOI MANZAR PURAANA AA GAYA
YAAD HAM KO BHOOLA BISRA HAR FASAANA AA GAYA

अक़्ल दुनिया के चलन से आशना होने को थी
ज़ेहन में फिर वो ख़याल-ए-अहमक़ाना आ गया
AQL DUNIYA KE CHALAN SE AASHNA HONE KO THI
ZAHN MEN PHIR WO KHAYAAL-E-AHMAQAANA AA GAYA

बात थी मेहर-ओ-वफ़ा की और निशाने पर थे हम
हम को तोहमत से बचाने इक बहाना आ गया
BAAT THI MEHR-O-WAFAA KI AUR NISHANE PAR THE HAM
HAM KO TOHMAT SE BACHAANE IK BAHAANA AA GAYA

मुद्दतों सहरा नवर्दी से अभी लौटे थे हम
रास्ते में फिर तुम्हारा आस्ताना आ गया
MUDDATON SEHRAA NAWARDI SE ABHI LAUTE THE HAM
RAASTE MEN PHIR TUMHARA AASTAANA AA GAYA

बाहमी नाइत्तेफ़ाक़ी मिट ही जाती आख़िरश
दर्मियाँ अपने ये बेग़ैरत ज़माना आ गया
BAAHAMI NAAITTEFAAQI MIT HI JAATI AAKHIRASH
DARMIYAAN APNE YE BE GHAIRAT ZAMAANA AA GAYA

आज फिर परवाज़ की ताब-ओ-तवाँ जाती रही
भूक हावी है, ख़याल-ए-आब-ओ-दाना आ गया
AAJ PHIR PARWAAZ KI TAAB-O-TAWAAN JAATI RAHI
BHOOK HAAWI HAI KHAYAAL-E-AAB-O-DAANA AA GAYA

हम हों महवर पर, …

हम्द (hamd) मेरे अश्कों से उलझती रहे आक़ाई तेरी

मेरे अश्कों से उलझती रहे आक़ाई तेरी
मैं किसी और से माँगूँ तो है रुस्वाई तेरी
mere ashkon se ulajhti rahe aaqaai teri
main kisi aur se maangun to hai ruswaai teri

फूल में, कलियों में, ख़ुर्शीद-ओ-क़मर में, हर सू
ज़र्रे ज़र्रे में महक मुझको नज़र आई तेरी
phool men kaliyon men khursheed-o-qamar men har soo
zarre zarre men jhalak mujh ko nazar aai teri

बन के तूफ़ान समंदर से चला क़हर तेरा
बाइस-ए-रक़्स-ए-ज़मीं बन गई अंगड़ाई तेरी
ban ke toofaan samandar se chala qahr tera
baais-e-raqs-e-zameen ban gai angdaai teri

धड़कनें होती हैं हर पल तेरे जल्वों पे निसार
एक इक शय में नज़र आती है रानाई तेरी
dhadkanen hoti hain har pal tere jalwon pe nisaar
ek ik shay men nazar aati hai raanaai teri

रूह बीमार है, दिल नालाँ है, बदज़न है ख़याल
कैसी मंज़िल पे मुझे जुस्तजू ले आई तेरी
rooh beemaar hai dil naalaan hai badzan hai khayaal
kaisi manzil pe mujhe justju le aai teri

हर तसव्वर से, तफ़क्कुर से, तजस्सुस से परे
जुस्तजू थक गई, मिलती नहीं गहराई तेरी
har tasawwar se tafakkur se tajassus se pare
justju thak gai milti nahin gahr…