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Showing posts from September 14, 2018

जो मुन्तज़िर हैं उम्मीदें , उन्हें बताया जाय

जोमुन्तज़िर हैंउम्मीदें , उन्हेंबतायाजाय येजलताशहरए वफ़ाकिसतरहबचायाजाय
सजाओलाखतबस्सुम, मगरनुमायाँरहे जिगरकादाग़भलाकैसेअबछुपायाजाय
जोकायनातएदिलओजाँ कोज़ेरओबमकरदे कुछइसतरहसेकोईहश्रअबउठायाजाय
मकानएदिलकेसभीरोज़नओदरबंदकरो अबआरज़ूकोयूँहीदरब दरफिरायाजाय
अजीबसीयेकशाकशहैदिलकीराहोंमें "केआगेजानसकूंलौटकरनआयाजाय "
मैंहँसनाचाहूँतोयेछीनलेलबोंसेहंसी

दे कर सदाएं बारहा , छुप कर वो मुस्कराए क्यूँ

देकरसदाएंबारहा , छुपकरवोमुस्कराएक्यूँ निस्बतनहींकोईतोफिर, हमसेनज़रचुराएक्यूँ
रखआएउसकेदरपेहमसबनिस्बतें , सारीख़ुशी वोअपनेइल्तेफातकाएहसानभी

उस का शेवा कि सितम तोड़ो, सताते जाओ

उसकाशेवाकिसितमतोड़ो, सतातेजाओ औरतकाज़ा, किहरइकज़ुल्मउठातेजाओ
क्यामज़ाजीनेका, सीखानजोमरनेकाहुनर मौतसेभीतोज़राआँखमिलातेजाओ
उस