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नज़्म - 9/11 (नाइन इलेवन)

पल वो नौ ग्यारह के वो मजबूरीयों का सिलसिला वो क़यामतख़ेज़ मंज़र हादसा दर हादसा मौत ने लब्बैक उस दिन कितनी जानों पर कहा कौन कर सकता है आख़िर उन पलों का तजज़िया
PAL WO NAU GYARAH KE WO MAJBOORIYO.N KA SILSILA  WO QAYAMAT KHEZ MANZAR HAADSA DAR HAADSA MAUT NE LABBAIK US DIN KITNI JAANO.N PAR KAHA KAUN KAR SAKTA HAI AAKHIR UN PALO.N KA TAJZIYAA
हादसा कहते हैं किस शै को, बला क्या चीज़ है डूबना सैलाब-ए-आतिश में भला क्या चीज़ है मौत से आँखें मिलाने की भला हिम्मत है क्या जिन पे गुज़री थी, ये पूछो उनसे, ये दहशत है क्या HAADSA KEHTE HAIN KIS SHAY KO BALA KYA CHEEZ HAI DOOBNA SAILAAB E AATISH ME.N BHALA KYA CHEEZ HAI MAUT SE AANKHE.N MILAANE KI BHALA HIMMAT HAI KYA JIN PE GUZRI THI, YE POOCHHO UN SE, YE DEHSHAT HAI KYA
पूछना है गर तो पूछो बूढ़ी माँओं से ज़रा जिन के लख़्त-ए-दिल को उन मुर्दा पलों ने खा लिया उन यतीमों से करो दरियाफ़्त, ग़म होता है क्या लम्हों में रहमत का साया जिन के सर से उठ गया POOCHHNA HAI GAR TO POOCHHO BUDHI MAAO.N SE ZARA JIN KE LAKHT E DIL KO UN MURDA PALO.N NE KHA LIYA UN YATEEMO.N SE KARO DARIYAAF…