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Showing posts from 2019

जब मिला हम से, सज़ा वो ही पुरानी दे गया

जब मिला हम से, सज़ा वो ही पुरानी दे गया दिल को दर्द-ए-बेकराँ, आँखों को पानी दे गया جب ملا ہم سے، سزا وہ ہی پرانی دے گیا دل کو دردِ بیکراں، آنکھوں کو پانی دے گیا
जाने किन नज़रों से उस ने आज देखा था मुझे बेनवा जज़्बात को गहरे मआनी दे गया جانے کِن نظروں سے اس نے آج دیکھا تھا مجھے بےنوا جذبات کو گہرے معانی دے گیا
गो ज़ुबां ख़ामोश थी, फिर भी कई बातें हुईं बेज़ुबां आँखों को वोसादाबयानी दे गया گو زباں خاموش تھی، پھر بھی کئی باتیں ہوئیں بے زباں آنکھوں کو وہ سادہ بیانی دے گیا
नाम अपना लिख गय़ा है वो किताब-ए-ज़ीस्त पर आज वो क़रतास-ए-दिल को इक कहानी दे गया نام اپنا لکھ گیا ہے وہ کتابِ زیست پر آج وہ قرطاسِ دل کو اک کہانی دے گیا
कोंपलेँ फिर फूट आईं, फिर बहार आने को है संगलाख़-ए-दिल को इक चादर वो धानी दे गया کونپلیں پھر پھوٹ آئیں، پھر بہار آنے کو ہے

इक एक कर के टूट गईं निस्बतें तमाम

इकएककरकेटूटगईंनिस्बतेंतमाम आओ, तोफिरफ़सानाभीयेअबकरेंतमाम
येकौनसामक़ामरिफ़ाक़तकाहै, जहाँ गुमफ़ासलोंमेंहोनेलगींक़ुर्बतेंतमाम
ज़ंजीरकोईरोकनपाएगीअब

तखय्युल के फ़लक से कहकशाएँ हम जो लाते हैं

तखय्युल केफ़लकसेकहकशाएँहमजोलातेहैं सितारेखैरमकदमकेलिएआँखेंबिछातेहैं
ज़मीरोंमें लगीहैज़ंग , ज़हन -ओ -दिलमुकफ़्फ़लहैं जोखुदमुर्दाहैं, जीनेकीअदाहमकोसिखातेहैं
मेरीतन्हाईकेदरपरयेदस्तककौनदेताहै मेरीतीराशबीमेंकिसकेसायेसरसरातेहैं
हक़ीक़तसेअगरचेकरलियाहैहमनेसमझौता हिसार -ए -ख्वाबमेंबेकसइरादेकसमसातेहैं
मज़ातोखूबदेतीहैयेरौनकबज़्मकीलेकिन मेरीतन्हाइयोंकेदायरेमुझकोबुलातेहैं
बिलकतीचीखतीयादेंलिपटजातीहैंकदमोंसे

कोई न सायबान, न कोई शजर कहीं

कोई न सायबान, न कोई शजर कहीं मसरुफ़ियत में खो गया मिटटी का घर कहीं
लाजिम है एहतियात, ये राह-ए-निजात है बहका के लूट ले न हमें राहबर कहीं
हम दर ब दर फिरे हैं सुकूँ की तलाश में हम को सुकून मिल न सका उम्र भर कहीं
अपनी तबाहियों का भी मांगेंगे हम हिसाब मिल जाए उम्र-ए-रफ़्तगाँ हम को अगर कहीं
इक उम्र हम रहे थे तेरे मुन्तज़िर जहाँ हम छोड़ आए हैं वो तेरी रहगुज़र कहीं
रौशन हमारी ज़ात से थे, हम जो बुझ गए गुम हो गए हैं सारे वो शम्स-ओ-क़मर कहीं
जब हो सका इलाज, न देखी गई तड़प घबरा के चल दिए हैं सभी चारागर कहीं
बरहम हवा से हम ने किया मारका जहाँ बिखरे पड़े हुए हैं वहीँ बाल-ओ-पर कहीं
उतरा है दिल में जब से तेरा इश्क-ए-लाज़वाल "पाती नहीं हूँ तब से म