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Showing posts from December 6, 2018

बेज़ारी की बर्फ़ पिघलना मुश्किल है

बेज़ारीकीबर्फ़पिघलनामुश्किलहै ख़्वाबोंसेदिलआजबहलनामुश्किलहै
तुन्द हवाओंसेलर्ज़ाँहैशम्म-ए-यक़ीं इसआंधीमेंदीपयेजलनामुश्किलहै
हरजानिबहैआग, सफ़रदुशवारहैअब जलतीहैयेराह, कि चलनामुश्किलहै
आगकीबारिश, ख़ौफ़ केदरियाकासैलाब इसमौसममेंघरसेनिकलनामुश्किलहै
गर्महैक़त्लओग़ारत काबाज़ारअभी येजाँकाजंजालतोटलनामुश्किलहै
उल्फ़तकीअबछाँवतलाशकरोयारो नफ़रतकाख़ुर्शीदतोढलनामुश्किलहै