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अजनबी एहसास

है रात गुलाबी, सर्द हवा बेदार1 हुआ है एक फुसूँ2 बेचैन पलों के नरग़े3 में मैं तनहा तनहा बैठी हूँ है ज़हन परेशाँ, बेकल दिल क्या जाने ये कैसी उलझन है खोई हूँ न जाने किस धुन में बस, जागते में भी सोई हूँ वीरान फ़ज़ा-ए-ज़हन में फिर आहट ये किसी की आती है रह रह के मुझे चौंकाती है रह रह के मुझे तडपाती है रह रह के तरब4 के कानों में आती है न जाने किस की सदा अब आग लगी अब सर्द हुई वो आस जली वो दर्द बुझा
कुछ यादें हैं कुछ साए हैं

मेरे महबूब, मेरे दोस्त, मेरी जान-ए-ग़ज़ल

मेरे महबूब, मेरे दोस्त, मेरी जान-ए-ग़ज़ल दो क़दम राह-ए-मोहब्बत में मेरे साथ भी चल
दो घड़ी बैठ मेरे पास, कि मैं पढ़ लूँ ज़रा तेरी पेशानी प लिक्खा है मेरी ज़ीस्त का हल
एक उम्मीद प उलझे हैं हर इक पेच से हम हौसला खोल ही देगा कभी तक़दीर के बल
वक़्त की गर्द छुपा देती है हर एक निशाँ संग पर खींची लकीरें रहें कितनी भी अटल
टूटे ख़्वाबों की ख़लिश1 जान भी ले लेती है ख़्वाब दिखला के मुझे ऐ दिल-ए-बेताब न छल
जी नहीं पाता है इंसान कभी बरसों में ज़िन्दगी करने को काफ़ी है कभी एक ही पल
नूर और नार2 का मैं रोज़ तमाशा देखूं ख़ूँचकाँ3 शम्स4 को तारीक5 फ़िज़ा जाए निगल
मार डाले न कहीं तुझ को ये तन्हाई का ज़हर दिल के वीरान अंधेरों से कभी यार निकल
नौहाख़्वाँ6 क्यूँ हुए "मुमताज़" सभी मुर्दा ख़याल मदफ़न7-ए-दिल में अजब कैसा ये हंगाम था कल

तमन्ना फड़फड़ा कर बुझ गई आहिस्ता आहिस्ता

तमन्ना फड़फड़ा कर बुझ गई आहिस्ता आहिस्ता जवाँ होने लगीतश्नालबी1आहिस्ताआहिस्ता
न जाने दिल ने क्या देखा तेरी आँखों की जुम्बिश2 में जली यकलख़्त3 हसरत4और बुझी आहिस्ता आहिस्ता
नक़ाब उलटी शफ़क़5 ने, शाम के रुख़6 पर सजा ग़ाज़ा7 उफ़क़8 के हाथ पर मेहंदी रची आहिस्ता आहिस्ता
बसेरा छोड़ कर जाना कहाँ आसान था इतना हुआ उम्मीद से ये दिल तही9 आहिस्ता आहिस्ता
शराब-ए-ज़िन्दगी में अब कहाँ पहले सी वो मस्ती तो लो रुख़्सत10 हुई ये बेख़ुदी11 आहिस्ता आहिस्ता
हुआ है रफ़्ता रफ़्ता13 इन्केशाफ़-ए-राज़-ए-हस्त-ओ-बूद14 उठी दिल से सदा-ए-अनहदी15आहिस्ताआहिस्ता
हक़ीक़त है, ख़िज़ां16 के बाद आती हैं बहारें17 भी ज़मीन-ए-दिल हरी होने लगी आहिस्ता आहिस्ता
रह-ए-तक़दीर18 पर हम वक़्त के हमराह19 चलते हैं गुज़रती जा रही है ज़िन्दगी आहिस्ता आहिस्ता
हमीं "मुमताज़" गुज़रे बारहा20 इस आज़माइश से

नीम गुलाबी

एक गुनह बस छोटा सा, इक लग़्ज़िश1 नीम2 गुलाबी दिल पर दस्तक देती है इक ख़्वाहिश नीम गुलाबी
लम्हा लम्हा पिघली जाती है हसरत आवारा दहके दो अंगारों की वो ताबिश3 नीम गुलाबी
पल भर में पैवस्त4 हुई है दिल के निहाँ5 ख़ानों6 में बोझल बोझल पलकों की इक जुम्बिश7 नीम गुलाबी
लूट लिया बहका कर मेरी राहत का सरमाया8 दिल ने नज़रों से मिल कर की साज़िश नीम गुलाबी
सुलगा जाए जिस्म का संदल9, महके फ़ज़ा बातिन10 की जलती है अब रूह11 तलक इक आतिश12 नीम गुलाबी
भीग गया जज़्बात का जंगल, फूट पड़ी हरियाली बरसों बाद गिरी दिल पर ये बारिश नीम गुलाबी
रोग है या आसेब13 है ये, कोई तो बताए मुझ को रह रह के होती है क्यूँ इक लर्ज़िश14नीम गुलाबी
हम भी दौलतमंद हुए, दिल ने भी ख़ज़ाना पाया वो दे कर "मुमताज़" गया इक बख़्शिश15 नीम गुलाबी 1- लड़खड़ाहट

बारिश

झमकताझूमताबरसाहैपानी गरजकरहोगएआमादाबादलजंगकरनेको उतरतीआतीहैंचांदीकीलड़ियाँआसमानोंसे इन्हींकीलयपेबिजलीरक्सकरतीहै चमकतीहै मचलतीहै मचलकरजगमगातीहै मैंखिड़कीपरखड़ीहूँ फुहारेंनर्मनाज़ुकसी मेरेगालोंपेबोसादेरहीहैं औरदिलमदहोशहोताजारहाहै हवाएंछेड़तीहैंज़ुल्फ़एबरहमको येबारिशकितनीमुद्दतबादआईहै येबारिशआजबरसोंबादआईहै
jhamakta jhoomta barsa hai paani garaj kar ho gae aamaada baadal jang karne ko