Posts

Showing posts from January 15, 2019

फ़र्श था मख़मल का, लेकिन तीलियाँ फ़ौलाद की

फ़र्श था मख़मल का, लेकिन तीलियाँ फ़ौलाद की हो न पाएँ हम रिहा, कोशिश रही सय्याद की
मरहबा ज़िन्दादिली, सद आफ़रीं फ़न्न-ए-हयात हम जहाँ पहुँचे, नई दुनिया वहाँ आबाद की
दाम में आया जुनूँ, अब हसरतों की ख़ैर हो दिल ने फिर तस्कीन की सूरत कोई ईजाद की
ऐ ख़ुदाई के तलबगारो, रहे ये भी ख़याल हो गई मिस्मार पल भर में इरम शद्दाद की
इश्क़ की पुख़्ता इमारत किस क़दर कमज़ोर थी ज़लज़ला आया कि ईंटें हिल गईं बुनियाद की
जब अना क़त्ल-ए-तरब की ज़िद पे आमादा हुई हसरतों ने बख़्त के दरबार में फ़रियाद की
कर लिया फ़ाक़ा, प फैलाया नहीं दस्त ए सवाल हर तरह हम ने भी रक्खी है वज़अ अजदाद की
लूट लेती हैं नशिस्तें यूँ भी कुछ मुतशाइरात "दाद लोगों की, गला अपना,