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Showing posts from December 16, 2018

ये कैसा दर्द है

ये कैसा दर्द है कैसी कसक है ये क्यूँ हरपलतेरीयादें मुझे बेचैन रखती हैं तेरी आँखें मेरे दिल पर वफ़ा का नाम लिखती हैं ये उल्फ़त की तपक है
मेरे राहतकदेमें क्यूँ ये उलझन बढती जाती है ये कैसा राब्ता है तेरे एहसास का इस दर्द से क्यूँ चुभ रही हैं तेरी साँसें मेरे चेहरे पर ख़यालों की धनक है
मेरी हस्ती कहाँ गुम होती जाती है अना ख़ामोश क्यूँ है ये जुनूँ को क्या हुआ ज़िद क्यूँ हेरासाँ है ये धड़कन क्यूँ परेशाँ है ये किस शय की खनक है