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Showing posts from February 4, 2019

टकराई जब टरक से मेरी कार साफ़ साफ़

टकराई जब टरक से मेरी कार साफ़ साफ़ वो ब्रांड न्यू से बन गई भंगार (कबाड़ ) साफ़ साफ़
मेहमाँ की बेहयाई से कुढ़ता है मेज़बाँ सुन लो हर इक निवाले प् चटखार साफ़ साफ़
अब के हुआ है यूँ मुझे खांसी का आरिज़ा बजने लगा है सांस का हर तार साफ़ साफ़
ख़ारिज हुई ख़िज़ाब की डेट एक्सपायरी चमका सफ़ेद जुल्फों का हर तार साफ़ साफ़
जब से चुनावी वादों का बैठा है सब ग़ुबार आने लगा है तब से नज़र यार साफ़ साफ़
मोदी नितीश की भी तो परतें उधड़ गईं भ्रष्टों का अब नुमायाँ है आचार साफ़ साफ़
मोदी की आन बान से नालाँ हैं जो शरद दिखने लगी है दोनों की यलग़ार साफ़ साफ़
पी. एम. भी अपने मुल्क का अब तो है एम. एम. एस. कोयले की कोठरी में है सरदार साफ़ साफ़
मिसरा दिया था अब्बा ने बेढब,