Posts

Showing posts from December 4, 2018

ख़ंजर हैं तअस्सुब के, और खून की होली है

ख़ंजर हैंतअस्सुबके, औरखून कीहोलीहै हमनेयेविरासतअबऔलादकोसौंपीहै
तारीकबयाबाँमेंयेकैसीतजल्लीहै येदिलकीसियाहीमेंक्याशयहैजोजलतीहै
जोहारेवोपाजाए, येइश्क़कीबाज़ीहै जबख़ुदकोगंवायाहै, तबजंगयेजीतीहै
हैदूरअभीसाहिल, तयहोतोसफ़रकैसे रूठाहुआमांझीहै, टूटीहुईकश्तीहै
बेताबजुनूँकायेअदनासाकरिश्माहै देहलीज़पेहसरतकीतक़दीरसवालीहै
देखाजोज़रामुड़के