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Showing posts from December 5, 2018

नफ़रतों का ये नगर मिस्मार होना चाहिए

नफ़रतों का ये नगर मिस्मार होना चाहिए अब मोहब्बत का खुला इज़हार होना चाहिए
एकता की कश्तियाँ मज़बूत कर लो साथियो अब त'अस्सुब का ये दरिया पार होना चाहिए
टूटे मुरझाए दिलों को प्यार से सींचो, कि अब रूह का रेग ए रवाँ गुलज़ार होना चाहिए
मुल्क देता है सदा, ऐ मेरे हमवतनो, उठो सो लिए काफ़ी, बस अब बेदार होना चाहिए
खौफ़ का सूरज ढले, सब के दिलों में हो यक़ीं है नहीं, लेकिन ये अब ऐ यार, होना चाहिए
कब तलक "मुमताज़" बेजा हरकतों का इत्तेबाअ हर सदा पर हाँ ? कभी इनकार होना चाहिए
nafratoN ka ye nagar mismaar hona chaaiye ab mohabbat ka khula izhaar hona chaahiye
zulmaton ka ye safar hamwaar hona chaahiye "aadmi ko aadmi se pyar hona chaahiye"