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नज़्म - हिसाब

हिसाब – हिस्सा पहला
सभी यादें, सभी सपने, सभी अरमान ले जाओ मेरी तुम ज़िन्दगी से अपना सब सामान ले जाओ
वो रौशन दिन, उरूसी शाम, वो सब चांदनी रातें वो खुशियाँ, वो सभी सरगोशियाँ, सब रेशमी बातें बहारों से सजा आँगन, सितारों से सजी राहें मोहब्बत के सभी नग़्मे, वो हसरत की सभी आहें तुम्हारी मुन्तज़िर वो धडकनें, जो अब भी ज़िंदा हैं वो सारे नक्श, जो दिल की ज़मीं पर अब भी ताज़ा हैं वो माज़ी की सुनहरी ख़ाक भी ले जाओ तुम आ कर धड़कते लम्हों की इम्लाक भी ले जाओ तुम आ कर
अभी तक मेरे बिस्तर पर पड़ी है लम्स की ख़ुशबू अभी तक दिल पे क़ाबिज़ है तुम्हारे प्यार का जादू तुम्हारी गुफ़्तगू के रंग बिखरे हैं समाअत पर तुम्हारी रेशमी आवाज़ का साया है फ़ुरसत पर सभी वादे, सभी क़समें, वो झूठा सच अक़ीदत का नशा वो बेक़रारी का, वो बिखरा ख़्वाब उल्फ़त का मेरी हर एक धड़कन, जो तुम्हारी अब भी क़ैदी है नफ़स का तार वो उलझा जो निस्बत से तुम्हारी है मेरे दिल की हर इक धड़कन, मेरी हर सांस ले जाओ तुम अपनी हर अमानत, अपना हर एहसास ले जाओ
वो ज़ंजीरें वफ़ा की, इश्क़ का ज़िन्दान ले जाओ मेरी तुम ज़िन्दगी से अपना सब सामान ले जाओ
हिसाब – हिस्सा दूसरा
मेरी राहत, मेरी नींदें…