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Showing posts from April 18, 2019

खुली नसीब की बाहें मरोड़ देंगे हम

खुली नसीब की बाहें मरोड़ देंगे हम कि अब के अर्श का पाया झिंझोड़ देंगे हम کھلی نصیب کی باہیں مروڑ دینگے ہم کہ اب کے عرش کا پایا جھنجوڑ دینگے ہم
जुनूँ बनाएगा बढ़ बढ़ के आसमान में दर ग़ुरूर अब के मुक़द्दर का तोड़ देंगे हम جنوں بنائیگا بڑھ بڑھ کے آسمان میں در غرور اب کے مقدر کا توڑ دینگے ہم
अभी उड़ान की हद भी तो आज़मानी है फ़लक को आज बलंदी में होड़ देंगे हम ابھی اُڑان کی حد بھی تو آزمانی ہے فلک کو آج بلندی میں ہوڑ دینگے ہم
है मसलेहत का तक़ाज़ा तो आओ ये भी सही हिसार-ए -आरज़ू थोडा सिकोड़ देंगे हम ہے مصلحت کا تقاضا تو آؤ یہ بھی سہی حصارِ آرزو تھوڑا سکوڑ لینگے ہم
जो ज़िद पे आए तो इक इन्क़ेलाब लाएँगे जेहाद-ए -वक़्त को लाखों करोड़ देंगे हम جو ضد پہ آئے تو اک انقلاب لائینگے جہادِ وقت کو لاکھوں کروڑ دینگے ہم
इरादा कर ही लिया है तो जान भी देंगे इस इम्तेहाँ में लहू तक निचोड़ देंगे हम