ग़ज़ल - ये ख़ला कैसा है दिल में, ज़हन क्यूँ मैला हुआ


ये ख़ला कैसा है दिल में, ज़हन क्यूँ मैला हुआ
क्या हुए एहसास सारे, दर्द को ये क्या हुआ
YE KHALA KAISA HAI DIL MEN ZEHN KYUN MAILA HUA
KYA HUE EHSAAS SAARE DARD KO YE KYA HUA

किस तरफ़ जाऊँ बड़ी उलझन में है ज़हन-ओ-नज़र
इक पहेली की तरह है रास्ता उलझा हुआ
KIS TARAF JAAUN BADI ULJHAN MEN HAI ZEHN O NAZAR
IK PAHELI KI TARAH HAI RAASTA ULJHA HUA

ख़्वाब दिखला कर सुहाने सारी ख़ुशियाँ लूट ले
आस्माँ यारो कोई क़ज़्ज़ाक़ है पहुँचा हुआ
 KHWAAB DIKHLA KAR SUNEHRE SAARI KHUSHIYAN LOOT LE
AASMAA.N YAARO KOI QAZZAQ HAI PAHONCHA HUA

दिल तो टूटा, हसरतें तो पारा पारा हैं मगर
मिट गईं सब उलझनें ये भी चलो अच्छा हुआ
 DIL TO TOOTA, HASRATEN TO PARA PARA HAIN MAGAR
MIT GAIN SAB ULJHANE.N YE BHI CHALO ACHCHHA HUA

हम तो समझे थे कि यादों का ये दरिया सर हुआ
ये ख़लिश सी क्यूँ है आख़िर, दर्द क्यूँ ज़िन्दा हुआ
 HAM TO SAMJHE THE KE YAADO.N KA WO DARIYA SAR HUA
YE KHALISH SI KYUN HAI AB PHIR DARD KYUN ZINDA HUA

इस सफ़र में हम बहुत आगे निकल आए मगर
हम को उलझाए है अब तक वक़्त वो बीता हुआ
 IS SAFAR MEN HAM BAHOT AAGE NIKAL AAE MAGAR
HAM KO ULJHAAE HAI AB TAK WAQT WO BEETA HUA

पड़ गया है इसमें भी शायद कहीं कोई शिगाफ़
बेहिसी के ग़ार से इक ख़्वाब है रिसता हुआ
 HO GAYA HAI IS MEN BHI SHAAYAD KAHIN KOI SHIGAAF
BEHISI KE GHAAR SE IK KHWAAB HAI RISTA HUA

आज शहर-ए-आरज़ू में क्यूँ ये हलचल मच गई
दफ़अतन क्यूँ खौल उट्ठा आबजू ठहरा हुआ
 AAJ SHEHR E AARZOO MEN KYUN YE HULCHUL MACH GAI
DAF'ATAN KYUN KHAUL UTTHA AABJU THEHRA HUA

उस को ख़त में लिख दिया है दिल का इक इक वाक़या
कुछ सुकूँ दिल को हुआ, कुछ बोझ तो हल्का हुआ
US KO KHAT MEN LIKH DIYA HAI DIL KA IK IK WAAQYA
KUCHH SUKOO.N DIL KO HUA KUCHH BOJH TO HALKA HUA

इस सराब-ए-ज़ात में क्या जुस्तजू उसकी करें
उसको देखे भी हमें "मुमताज़" इक अरसा हुआ
 IS SARAAB E ZAAT MEN KYA JUSTJU US KI KAREN
US KO DEKHE BHI HAMEN 'MUMTAZ' IK ARSA HUA

ख़ला - ख़ालीपन, आस्माँ  - क़िस्मत,  क़ज़्ज़ाक़ - लुटेरा, पारा पारा - टुकड़ा टुकड़ा, सर हुआ - जीत लिया गया, ख़लिश - चुभन, शिगाफ़ - दरार, बेहिसी - भावना शून्यता, ग़ार - गुफा, दफ़अतन - अचानक,  आबजू - नहर, सराब-ए-ज़ात - अन्तर्मन की मरीचिका, अरसा - लंबा वक़्त

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