ज़िन्दगी ऐ ज़िन्दगी

हम को ले आई कहाँ तू ज़िन्दगी ऐ ज़िन्दगी
है जहाँ की एक इक शै आरज़ी ऐ ज़िन्दगी

राह की हर एक मुश्किल कर चुकी आसान जब
ख़त्म पर है अब सफ़र, क्यूँ थक गई ऐ ज़िन्दगी

हैं जहाँ धोखे, छलावे, दर्द, आँसू, बेकसी
आग के इक बेकराँ सैलाब सी ऐ ज़िन्दगी

उम्र भर मैंने पिया है ज़हर जो तू ने दिया
फिर भी क्यूँ मिटती नहीं ये तश्नगी, ऐ ज़िन्दगी

जब बुरा था वक़्त मेरा साथ बस तू ने दिया
इशरतों में अब कहाँ तू खो गई, ऐ ज़िन्दगी

सारे मंज़र हो गए धुंधले, नज़र में बच रही
क़तरा क़तरा बेबसी ही बेबसी ऐ ज़िन्दगी

रफ़्ता रफ़्ता यार छूटे, खो गया हर हमसफ़र
रह गई मुमताज़ बस इक बेकली, ऐ ज़िन्दगी  


शै चीज़, आरज़ी नक़ली, बेकराँ अथाह, तश्नगी प्यास, इशरत आराम, क़तरा क़तरा बूँद बूँद 

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