जूनून सा है , कभी इन्क़ेलाब जैसा है


जूनून  सा  है , कभी  इन्क़ेलाब जैसा  है
हर  इक  नज़ारा  रह--दिल  का  ख़्वाब  जैसा  है

मैं  इस  सराब    तज़बज़ुब में  कब  तलक  भटकूँ
तेरा  ये  लुत्फ़--करम  भी  अज़ाब  जैसा  है

लगी  है  अब्र  को  शायद  वो  मस्त  मस्त  नज़र
जो  अब  के  बरसा  है  पानी, शराब  जैसा  है

  जाने  कैसे  उठे, कैसे, कब, कहाँ  टूटे
ये  हस्त--बूद  का  आलम  हुबाब  जैसा  है

ज़रा  सी  बात  पे  हलचल  सी  मचने  लगती  है
ये  दिल  भी  क्या  है, किसी  सतह--आब  जैसा  है

मुझे  गुनाह--मोहब्बत  का  ऐतराफ़  तो  है
गुनाह  ये  भी  मगर  इक  सवाब  जैसा  है

मेरे  सवाल  के  बदले  वो  यूँ  सवाल  करे
कि  हर  सवाल  भी  गोया  जवाब  जैसा  है

हर  एक  क़तरा  बड़ी  तशनगी  समेटे  है
"ये  क्या  सितम  है  कि  दरिया  सराब  जैसा  है"

  कोई  रब्त,   कुछ  सिलसिला  हवादिस  में
सफ़र  हयात  का  "मुमताज़" ख़्वाब  जैसा  है

جنون  سا  ہے , کبھی  انقلاب  جیسا  ہے
ہر  اک  نظارہ  رہ_دل  کا  خواب  جیسا  ہے

میں  اس  سراب_ تذبذب  میں  کب  تلک  بھٹکوں
ترا  یہ  لطف  و  کرم  بھی  عذاب  جیسا  ہے

لگی  ہے  ابر  کو  شاید  وہ  مست  مست  نظر
جو  اب  کے  برسا  ہے  پانی , شراب  جیسا  ہے

نہ  جانے  کیسے  اٹھے , کیسے , کب , کہاں  ٹوٹے
یہ  ہست  و  بعد  کا  عالم  حباب  جیسا  ہے

ذرا  سی  بات  پہ  ہلچل  سی  مچنے  لگتی  ہے
یہ  دل  بھی  کیا  ہے , کسی  سطح _آب  جیسا  ہے

مجھے  گناہ_ محبت   کا  اعتراف  تو  ہے
گناہ  یہ  بھی  مگر  اک  ثواب  جیسا  ہے

میرے  سوال  کے  بدلے  وہ   یوں  سوال  کرے
کہ   ہر  سوال  بھی  گویا  جواب  جیسا  ہے

ہر  ایک  قطرہ  بڑی  تشنگی  سمیٹے  ہے
"یہ  کیا  ستم  ہے  کہ   دریا  سراب  جیسا  ہے "

نہ  کوئی  ربط , نہ  کچھ  سلسلہ  حوادث  میں
سفر  حیات  کا  "ممتاز " خواب  جیسا  ہے


Comments

Popular posts from this blog

फ़र्श था मख़मल का, लेकिन तीलियाँ फ़ौलाद की

भड़कना, कांपना, शो'ले उगलना सीख जाएगा

किरदार-ए-फ़न, उलूम के पैकर भी आयेंगे