मेरी गुस्ताख़ हसरत से ग़मों को सख़्त हैरत है


मेरी  गुस्ताख़ हसरत  से  ग़मों को  सख़्त हैरत  है
उधर  बेचैन  है  क़ुदरत, इधर  गर्दिश  में  ख़ल्क़त है

तड़प  कर  आह  करना  भी  मोहब्बत  में  बग़ावत है
करे  फ़रियाद, सर  फोड़े, यहाँ  किस  को  इजाज़त  है

मुझे  अपने  जुनूँ  पर  क्यूँ    आख़िर हो  ग़ुरूर इतना
है तेरा ज़ुल्म गर दायम तो  मेरी  ज़िद  भी  मुसबत  है

हर इक गुल  खिलखिलाने  के  लिए  बेताब  है  कब  से
बहारों  के  'अक्क़ुब में  अभी  मसरूफ़ निकहत है

तमन्ना  के  अलीलों  की  तड़प  देखी  नहीं  जाती
कोई  दरमाँ नहीं  मिलता, परेशानी  में  हिकमत  है

हमेशा  हुस्न  यूँ  भी  झुक  गया  है  इश्क़  के  आगे
नज़र में क़ैद  हसरत से  ही  तो  जलवों  की  ज़ीनत  है

ख़लील    नातवां  को  आतिश    नमरूद  से डर क्या
'अस्सुब  सर  सजदा  है, मोहब्बत  की  करामत  है

मोहब्बत है तो हस्त--बूद क्या, दिल क्या, अना कैसी
"इबादत  और  क़द्र--होश? तौहीन--इबादत  है "

बिछौना  ख़ाक  का  है, सर  पे  साया  आसमाँ का  है
मैं  हूँ  'मुमताज़' मेरी  ठोकरों  पर  जाह--हशमत  है

میری  گستاخ  حسرت  سے  غموں  کو  سخت  حیرت  ہے
ادھر  بیچین  ہے  قدرت , ادھر  گردش  میں  خلقت  ہے

تڑپ  کر  آہ  کرنا  بھی  محبت  میں  بغاوت  ہے
کرے  فریاد , سر  پھوڑے  , یہاں  کس  کو  اجازت  ہے

مجھے  اپنے  جنوں  پر  کیوں  نہ  آخر  ہو  غرور  اتنا
اگر  یہ  ظلم  ہے  دائم   تو  میری  ضد  بھی  مثبت  ہے

ہر  اک  گل  کھلکھلانے  کے  لئے  بیتاب  ہے  کب  سے
بہاروں  کے  تعقب  میں  ابھی  مصروف  نکہت  ہے

تمنا  کے  علیلوں  کی  تڑپ  دیکھی  نہیں  جاتی
کوئی  درماں  نہیں  ملتا , پریشانی  میں  حکمت  ہے

ہمیشہ  حسن  یوں  بھی  جھک  گیا  ہے  عشق  کے  آگے
نظر  میں  قید  حسرت  سے  ہی  تو  جلووں  کی  زینت  ہے

خلیل  ناتواں  کو  آتش نمرود  بھی  کم  ہے
تعصّب  سر  بہ  سجدہ  ہے , محبت  کی  کرامت  ہے

محبت  ہے  تو  ہست  و  بود  کیا , دل  کیا , انا  کیسی
"عبادت، اور  بقدر  ہوش ? توہین  عبادت  ہے "

بچھونا  خاک  کا  ہے , سر  پ  سایہ  آسماں کا  ہے
میں  ہوں  'ممتاز ' میری  ٹھوکروں  پر  جاہ  و  حشمت  ہے

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