इस अदा से गूँजता है नारा ए रिन्दाना आज


इस  अदा  से  गूँजता  है  नारा    रिन्दाना  आज
वज्द  में  आया  है  साक़ी, झूम  उठा  मैख़ाना आज

चूम  लेती  है  लपक  कर  शमअ  की  लौ  बारहा
मौत  के  आहंग  पर  रक़्साँ  है  फिर  परवाना  आज

फिर  ख़िरद जोश--जुनूँ के  बढ़  के  चूमेगी  क़दम
अर्श  को  भी  तोड़  देगा  नारा    मस्ताना  आज

वुसअतें सब  ज़ात  की  यकजा  हुईं  तो  यूँ  हुआ
अपने  हर  इक  ज़ाविये  को  मैं  ने  भी  पहचाना  आज

चूर  होती  हैं  लरज़  कर  जिस  से  सब  दुश्वारियाँ
हिम्मत    निस्वाँ में  आई  क़ुव्वत   मर्दाना  आज

वहशत    तन्हाई  से  ये  दिल  बहुत  घबरा  गया
चल  पड़ा  है  महफ़िलों  की  सिम्त  ये  वीराना  आज

कैसी  ये  मस्ती  है  तारी , कौन  सा  है  ये  सुरूर
"किस  लिए  तू  झूमता  है    दिल    दीवाना  आज"

मल्गुजी  हर  हौसले  पर  फिर  निखार  आने  लगा
  गया  "मुमताज़" वीरानों  को  भी  इतराना  आज

اس  ادا  سے  گونجتا  ہے  نارا_رندانہ  آج
وجد  میں  آیا  ہے  ساقی , جھوم  اٹھا  میخانہ  آج

چوم  لیتی  ہے  لپک  کر  شمع کی  لو  بارہا
موت  کے  آہنگ پررقصاں  ہے  پھر  پروانہ  آج

پھر  خرد  جوش_جنوں  کے  بڑھ  کے  چومیگی  قدم
عرش  کو  بھی  توڑ  دیگا  نارا_مستانہ  آج

وسعتیں  سب  ذات  کی  یکجا  ہوئیں  تو  یوں  ہوا
اپنے  ہر  اک  زاویے  کو  میں  نے  بھی  پہچانا  آج

چور  ہوتی  ہیں  لرز  کر  جس  سے  سب  دشواریاں
ہمّت_نسواں  میں  آئ  قوّت_مردانہ  آج

وحشت_تنہائی  سے  یہ  دل  بہت  گھبرا  گیا
چل  پڑا  ہے  محفلوں  کی  سمت  یہ  ویرانہ  آج

کیسی  یہ  مستی  ہے  طاری , کون  سا  ہے  یہ  سرور
"کس  لئے  تو  جھومتا  ہے  ہے  دل_دیوانہ  آج"


ملگجی  ہر  حوصلے  پر  پھر  نکھار  آنے  لگا
آ  گیا  "ممتاز " ویرانوں  کو  بھی  اترانا  آج



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