कभी सरापा इनायत, कभी बला होना


कभी सरापा इनायत, कभी बला होना
ये किस से आप ने सीखा है बेवफ़ा होना

उसे सफ़र की थकन ने मिटा दिया लेकिन
न रास आया हमें भी तो रास्ता होना

दिल-ओ-दिमाग़ की परतें उधेड़ देता है
दिल-ओ-दिमाग़ की दुनिया का क्या से क्या होना

सितम ज़रीफ़ ये तेवर, ये क़ातिलाना अदा
कभी हज़ार गुज़ारिश, कभी ख़फ़ा होना

वो इक अजीब सा नश्शा वो मीठी मीठी तड़प
वो पहली बार मोहब्बत से आशना होना

ख़ुमार इस में भी "मुमताज़" तुम को आएगा
किसी ग़रीब का इक बार आसरा होना

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