भड़कना, कांपना, शो'ले उगलना सीख जाएगा


भड़कना, कांपना, शो'ले  उगलना  सीख  जाएगा
चराग़ ए  रहगुज़र  तूफ़ाँ में  जलना  सीख  जाएगा

नया  शौक़    सियासत  है, ज़रा  कुछ  दिन  गुज़रने  दो
बहुत  ही  जल्द  वो  नज़रें  बदलना  सीख  जाएगा

अभी  एहसास  की  शिद्दत  ज़रा  तडपाएगी  दिल  को
अभी  टूटी  है  हसरत, हाथ  मलना  सीख  जाएगा

हर  इक  अरमान  को  मंज़िल  मिले  ये  क्या  ज़रूरी  है
उम्मीदों  से  भी  दिल  आख़िर  बहलना  सीख  जाएगा

शनासा  रफ़्ता  रफ़्ता  मसलेहत  से  होता  जाएगा
ये  दिल  फिर  आरज़ूओं  को  कुचलना  सीख  जाएगा

ये  बेहतर  है  के  बच्चे  को  ज़मीं  पर  छोड़  दें  अब  हम
अगर  कुछ  लडखडाया  भी  तो  चलना  सीख  जाएगा

छुपा  है  दिल  में  जो  आतिश फ़िशां , इक  दिन  तो  फूटेगा
रुको  "मुमताज़" ये  लावा  उबलना  सीख  जाएगा 



bhadakna, kaanpna, sho'le ubalna seekh jaaega
charaaghe rehguzar toofaaN meN jalna seekh jaaega

naya shauq e siyaasat hai, zara kuchh din guzarne do
bahot ho jald wo nazreN badalna seekh jaaega

abhi ehsaas ki shiddat zara tadpaaegi dil ko
abhi tooti hai hasrat, haath malna seekh jaaega

har ik armaan ko manzil mile ye kya zaroori hai
ummeedoN se bhi dil aakhir bahalna seekh jaaega

shanaasa rafta rafta maslehat se hota jaaega
ye dil phir aarzoo'on ko kuchalna seekh jaaega

ye behtar hai ke bachche ko zameeN par chhod deN ab ham
agar kuchh ladkhadaaya bhi to chalna seekh jaaega

chhupa hai dil meN jo aatishfishaaN, ik din to phootega
ruko "Mumtaz" ye laava ubalna seekh jaaega


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