रोए है , न तडपे है , न फ़रियाद करे है


रोए  है ,   तडपे  है ,   फ़रियाद  करे  है
तन्हाई  की  बस्ती  ये  दिल  आबाद  करे  है

हर  तार--गरेबाँ सितम  ईजाद  करे  है
अब  आम  जुनूँ  सब  मेरी  रूदाद  करे  है

वहशत  का  हर  इक  लम्हा  तुझे  याद  करे  है
तन्हाई  शब-ए-तीरा  की  फ़रियाद  करे  है

रेज़े  ये  तबाही  के  कहाँ  तक  मैं  समेटूं
ये  कौन  हमेशा  मुझे  बरबाद  करे  है

हर  बार  फ़ना  हो  के  सिवा  होती  है  ख़्वाहिश
क्या  हसरत    नाकाम  भी  बेदाद  करे  है

आज़ाद  किया  मैं  ने  तुझे  क़ैद    वफ़ा  से
वो  कितनी  अदा  से  ये  अब  इरशाद  करे  है 

देती  है  हर  इक  लम्हा  तमन्ना  वो  अज़ीअत
क्या  ऐसा  सितम  कोई  भी  जल्लाद  करे  है

जाने  तुझे  एहसास  भी  होगा , कि    होगा
अब  तक  तुझे  'मुमताज़'   हज़ीं  याद  करे  है
रेज़े= टुकड़े, तार= धज्जी, सितम= तकलीफ पहुंचाना, ईजाद= खोज, जुनूँ= पागलपन, रूदाद= कहानी, फ़ना= मिटना, हसरत नाकाम= पूरी होने वाली इच्छा, बेदाद= नाइंसाफी, वहशत= ऊब, लम्हा= पल, शब् तीरा= अँधेरी रात, अज़ीअत= तकलीफ, हज़ीं= दुखी

روئے ہے , نہ  تڑپے  ہے , نہ  افتاد  کرے  ہے
تنہائی  کی  بستی  یہ  دل  آباد  کرے  ہے

ہر  تار_گریباں  ستم  ایجاد  کرے  ہے
اب  عام  جنوں  سب  مری  روداد  کرے  ہے

وحشت  کا  ہر  اک  لمحہ  تجھے  یاد  کرے  ہے
تنہائی  شب_تیرہ  کی  فریاد  کرے  ہے

ریزے  یہ  تباہی  کے  کہاں  تک  میں  سمیٹوں
یہ  کون  ہمیشہ  مجھے  برباد  کرے  ہے

ہر  بار  فنا  ہو  کے  سوا  ہوتی  ہے  خواہش
کیا  حسرت_ناکام  بھی  بیداد  کرے  ہے

آزاد  کیا  میں  نے  تجھے  قید_وفا  سے
وہ  کتنی  ادا  سے  یہ  اب  ارشاد  کرے  ہے 

دیتی  ہے  ہر  اک  لمحہ  تمنا  وہ   اذیت
کیا  ایسا  ستم  کوئی  بھی  جللاد  کرے  ہے

جانے  تجھے  احساس  بھی  ہوگا , کہ   نہ  ہوگا
اب  تک  تجھے  'ممتاز'_حزیں  یاد  کرے  ہے



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