दुनियादारी के सारे ढब आते हैं


दुनियादारी  के  सारे  ढब आते  हैं
हम  को  भी  अब  सारे  करतब  आते  हैं

लाज़िम  है  तालीम  भी  लेकिन  कुछ  बच्चे
खाना  खाने  को  भी  मकतब  आते  हैं

कब  से  टाले  वो  हम  को  ये  कह  कह  के
आते  हैं,  अब  आते  हैं,  अब  आते  हैं

कितनी  बातें  सुनना  चाहूँ  मैं,  लेकिन
आते  हैं  जब  वो,  सी  कर  लब  आते  हैं

मेरे  अन्दर  के  बहर--ख़ामोशी  में
कितने  तूफाँ  हर  दिन  या  रब  आते  हैं

मोड़  कोई  क़िस्मत  फिर  लेने  वाली  है
ख़्वाबों  में  अपने  अब  अक़रब आते  हैं

बेज़ारी, बेदाद, जफ़ा,  तर्क--उल्फ़त
उन  को  सब  बातों  के  मतलब  आते  हैं

जागी  आँखों  का  मंज़र  भी  देख  ज़रा
"ख़्वाबों  का  क्या  है, वो  हर  शब  आते  हैं "

खिल  उठते  हैं  फूल  सुना  है  हर  जानिब
वो  मौसम  'मुमताज़ ' यहाँ  कब  आते  हैं

دنیاداری  کے  سارے  ڈھب  آتے  ہیں
ہم  کو  بھی  اب  سارے  کرتب  آتے  ہیں

لازم  ہے  تعلیم  بھی  لیکن  کچھ  بچے 
کھانا کھانے  کو  بھی  مکتب  آتے  ہیں

کب  سے  ٹالے ہیں  ہم  کو  یہ  که  که  کے
آتے  ہیں , اب  آتے  ہیں , اب  آتے  ہیں

کتنی  باتیں  سننا  چاہوں  میں , لیکن
آتے  ہیں  جب  وہ  , سی  کر  لب  آتے  ہیں

میرے  اندر  کے  بحر_ خاموشی  میں
کتنے  طوفاں ہر  دن  یا  رب  آتے  ہیں

موڑ  کوئی  قسمت  پھر  لینے  والی  ہے
خوابوں  میں  اپنے  اب  اقرب  آتے  ہیں

بیزاری، بیداد، جفا، ترک_ الفت
ان  کو  سب  باتوں  کے  مطلب  آتے  ہیں

جاگی  آنکھوں  کا  منظر  بھی  دیکھ  ذرا
"خوابوں  کا  کیا  ہے , وہ   ہر  شب  آتے  ہیں "

کھل  اٹھتے  ہیں  پھول  سنا  ہے  ہر  جانب
وہ  موسم  'ممتاز ' یہاں  کب  آتے  ہیں


Comments

Popular posts from this blog

फ़र्श था मख़मल का, लेकिन तीलियाँ फ़ौलाद की

भड़कना, कांपना, शो'ले उगलना सीख जाएगा

किरदार-ए-फ़न, उलूम के पैकर भी आयेंगे