दिल में सैराबी का एहसास जगाना होगा



दिल  में  सैराबी  का  एहसास  जगाना  होगा
थपकियाँ  दे  के  ज़रुरत  को  सुलाना  होगा

अब  बने  या    बने , साथ  तो  ताउम्र  का  है
अब  किसी  तौर  तो  क़िस्मत  से  निभाना  होगा

आज  बंजर  है  ज़मीं  दिल  की , चलो  मान  लिया
पत्थरों  में  भी  दबा  कोई  ख़ज़ाना  होगा

रश्क  तारे  भी  करेंगे  मेरे  इन  अश्कों  पे
जब  ये  सर  होगा  मेरा  और  तेरा शाना  होगा

कब  तलक  काम  करेगी  ये  अदाकारी  भी
एक  दिन  हम  को  ये  पर्दा  तो  गिराना  होगा

तेरी  बदरूई  में  इतनी  है  कशिश  क्यूँ  आख़िर
"ज़िन्दगी  आज  तुझे  राज़  बताना  होगा "

दिल  में  'मुमताज़ ' ये सहबा भी छुपा  कर  रख  लो
फिर  मज़ा  देगा , जो  ये  दर्द  पुराना  होगा


دل  میں  سیرابی  کا  احساس  جگانا  ہوگا
تھپکیاں  دے  کے  ضرورت  کو  سلانا  ہوگا

اب  بنے  یا  نہ  بنے , ساتھ  تو  تاعمر  کا  ہے
اب  کسی  طور  تو  قسمت  سے  نبھانا  ہوگا

آج  بنجر  ہے  زمیں  دل  کی , چلو  مان  لیا
پتھروں  میں  بھی  دبا  کوئی  خزانہ  ہوگا

رشک  تارے  بھی  کرینگے  میرے  ان  اشکوں  پہ 
جب  یہ  سر  ہوگا  مرا  اور  ترا  شانہ  ہوگا

کب  تلک  کام  کریگی  یہ  اداکاری  بھی
ایک  دن  ہم  کو  یہ  پردہ  تو  گرانا  ہوگا

تیری  بدروئی   میں  اتنی  ہے  کشش  کیوں  آخر
"زندگی  آج  تجھے  راز  بتانا  ہوگا "

دل  میں  'ممتاز ' ابھی  مے یہ  چھپا  کر  رکھ  لو
پھر  مزہ  دیگا , جو  یہ  درد  پرانا  ہوگا




dil meN sairaabi ka ehsaas jagaana hoga
thapkiyaaN de ke zaroorat ko sulaana hoga

ab bane ya na bane, saath to taaumr ka hai
ab kisi taur to qismat se nibhaana hoga

aaj banjar hai zameeN dil ki, chalo maan liya
pattharoN meN bhi daba koi khazaana hoga

rashk taare bhi karenge mere in ashkoN pe
jab ye sar hoga mira aur tira shaana hoga

kab talak kaam karegi ye adaakaari bhi
ek din ham ko ye parda to giraana hoga

teri badrooi meN itni hai kashish kyuN aakhir
"zindagi aaj tujhe raaz bataana hoga"

dil men 'Mumtaz' abhi mai ye chhupa kar rakh lo
phir mazaa dega, jo ye dard puraana hoga

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