तेरी याद आ रही है



अब साँस साँस में इक महशर उठा रही है
तेरी बात बात मुझ को अब याद आ रही है

वो पहली पहली नज़रें उल्फ़त का पहला मौसम
बेताब सी तमन्ना, वो रहबरी का आलम
मुझे देख कर तेरा वो कोई शेर गुनगुनाना
कोई दास्तान कहना कोई मसअला सुनाना
रंगों की चाशनी में भीगे पयाम सारे
वो गीत, वो तराने, वो झूमते इशारे
ख़्वाबों की बारिशों में वो भीगती सी बातें
वो लाज़वाल जज़्बा, वो बेतकान रातें
वो आशिक़ी का जादू इक़रार का वो नश्शा
वो डूबती सी धड़कन इसरार का वो नश्शा
जब रक़्स में थे लम्हे, आलम ख़ुमार में था
इक बेक़रार नग़्मा हर इक क़रार में था

उल्फ़त का आशिक़ी का हर इक रिवाज बदला
मौसम की तरह जानाँ तेरा मिज़ाज बदला
जज़्बों की वो दीवाली अरमान की वो ईदें
रूठे वो ख़्वाब सारे टूटीं सभी उम्मीदें

जादू वो आशिक़ी का गो अब भी जागता है
नश्शा वो दर्द बन कर सीने में चुभ रहा है
रोती है हर तमन्ना, ज़ख़्मी है हर नज़ारा
बैठा है मुँह छुपाए हर झूमता इशारा
हर दास्तान चुप है ख़ामोश हैं फ़साने
अब खून रो रहे हैं वो गीत वो तराने

मिज़गाँ की चिलमनों में मोती पिरो गया है
जाने कहाँ वो तेरा अब प्यार खो गया है 
अब साँस साँस में इक महशर उठा रही है
तेरी बात बात मुझ को अब याद आ रही है

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