जो मुन्तज़िर हैं उम्मीदें , उन्हें बताया जाय


जो  मुन्तज़िर हैं  उम्मीदें , उन्हें  बताया  जाय
ये  जलता  शहर  ए वफ़ा  किस  तरह  बचाया  जाय

सजाओ  लाख  तबस्सुम, मगर  नुमायाँ  रहे
जिगर  का  दाग़  भला  कैसे  अब  छुपाया  जाय

जो  कायनात    दिल    जाँ को  ज़ेर    बम  कर  दे
कुछ  इस  तरह  से  कोई  हश्र  अब  उठाया  जाय

मकान    दिल  के  सभी  रोज़न    दर  बंद  करो
अब  आरज़ू  को  यूँ  ही  दर  ब दर  फिराया  जाय

अजीब  सी  ये  कशाकश  है  दिल  की  राहों  में
"के  आगे  जा    सकूं  लौट  कर    आया  जाय "

मैं  हँसना  चाहूँ  तो  ये  छीन  ले  लबों  से  हंसी
शिकस्ता  ज़ात  से  "मुमताज़" क्या  निभाया  जाय



jo muntazir haiN ummeedeN, unheN bataaya jaay
ye jalta shehr e wafaa kis tarah bachaaya jaay

sajaao laakh tabassum, magar numaayaaN rahe
jigar ka daagh bhala kaise ab chhupaaya jaay

jo kaaynaat e dil o jaaN ko zer o bam kar de
kuchh is tarah se koi hashr ab uthaaya jaay

makaan e dil ke sabhi rozan o dar band karo
ab aarzoo ko yuN hi dar ba dar phiraaya jaay

ajeeb si ye kashaakash hai dil ki raahoN meN
"ke aage jaa na sakooN laut kar na aaya jaay"

maiN hansna chaahooN to ye chheen le laboN se hansi
shikasta zaat se "Mumtaz" kya nibhaaya jaay

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