इस मुसाफ़त से मुझे क्या है मिला याद नहीं


इस मुसाफ़त से मुझे क्या है मिला याद नहीं
क्या मेरे पास है, क्या क्या है लुटा याद नहीं
اس مسافات سے مجھے کیا ہے ملا یاد نہیں
کیا مرے پاس ہے، کیا کیا ہے لٹا یاد نہیں

दिल का ये शहर उजड़ जाने का एहसास तो है
हो गई कैसे क़यामत ये बपा याद नहीं
دل کا یہ شہر اجڑ جانے کا احساس تو ہے
ہو گئی کیسے قیامت یہ بپا یاد نہیں

आग सी जलती रही दिल की सियाही में मगर
कौन इस आतिश-ए-दोज़ख़ में जला याद नहीं
آگ سی جلتی رہی دل کی سیاہی میں مگر
کون اس آتشِ دوزخ میں جلا یاد نہیں

वहशतें ऐसी कि ख़ुद से भी हेरासाँ हैं हम
बेख़ुदी ऐसी कि अपना भी पता याद नहीं
وحشتیں ائیسی کہ خود سے بھی حراساں ہیں ہم
بیخودی ائیسی کہ اپنا بھی پتہ یاد نہیں

ये तो है याद कि दिल में थी बड़ी आग मगर
कब ये दिल सर्द हुआ, कब ये बुझा याद नहीं
یہ تو ہے یاد کہ دل میں تھی بڑی آگ مگر
کب یہ دل سرد ہوا، کب یہ بجھا یاد نہیں

हम तो राहों के मनाज़िर में हुए गुम ऐसे
कारवाँ जाने कहाँ जा के रुका याद नहीं
ہم تو راہوں کے مناظر میں ہوئے گم ائیسے
کارواں جانے کہاں جا کے رکا یاد نہیں

जिसके होने से मेरी ज़ात में तुग़ियानी थी
अब तलक कौन मेरे साथ चला याद नहीं
جس کے ہونے سے مری ذات میں طغیانی تھی
اب تلک کون مرے ساتھ چلا یاد نہیں

क़र्ज़ मुमताज़ था साँसों का हमारे सर पर
क़र्ज़ हमने ये किया कैसे अदा याद नहीं
قرض ممتازؔ تھا سانسوں کا ہمارے سر پر
قرض ہم نے یہ کیا کیسے ادا یاد نہیں

Comments

Popular posts from this blog

फ़र्श था मख़मल का, लेकिन तीलियाँ फ़ौलाद की

भड़कना, कांपना, शो'ले उगलना सीख जाएगा

किरदार-ए-फ़न, उलूम के पैकर भी आयेंगे