अलम सर फोड़ लें, सब हसरतें रंजूर हो जाएं

अलम सर फोड़ लें, सब हसरतें रंजूर हो जाएं
हमारी एक हिचकी से सभी ग़म दूर हो जाएं

अना के सब घरोंदे एक पल में चूर हो जाएं
हम अपनी हसरतों से इस क़दर मजबूर हो जाएं

हर इक दर्द ओ अलम, हर रंज से अब दूर हो जाएं
हम अपनी वहशतों में इस क़दर महसूर हो जाएं

तड़पने की इजाज़त हम अता कर दें अगर दिल को
तो ख़्वाबों के ये शीशे गिर के चकनाचूर हो जाएं

अना का सर कुचलने से तो कुछ हासिल नहीं होगा
तक़ाज़ा रंजिशों का है कि हम मग़रूर हो जाएं

मेरी हस्ती न हो तो ज़ख़्मी हो जाए अना उस की
न वो जलवा हो तो आँखें मेरी बेनूर हो जाएं

गुज़िश्ता याद का "मुमताज़" गर आसेब लग जाए
तमन्नाओं के ये खंडर अभी मसहूर हो जाएं


अलम-दर्द, रंजूर-दुखी, अना-अहम्, महसूर-दायरे में बंद, अता कर दें- बख्श दें, मगरूर-घमंडी, बेनूर-अँधेरा, गुज़िश्ता-बीता हुआ, आसेब- आत्मा का क़ब्ज़ा, मसहूर- जादू से प्रभावित  

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