ग़ज़ल - कौन है तू मेरा, क्या तुझ से मेरा रिश्ता है

कौन है तू मेरा, क्या तुझ से मेरा रिश्ता है
अजनबी हो के भी अपना सा मुझे लगता है
KAUN HAI TU MERA, KYA MUJH SE TERA RISHTA HAI
AJNABEE HO KE BHI APNA SA MUJHE LAGATA HAI

एक एहसास मुझे महव किए रहता है
इक ख़यालों के समंदर में ये दिल डूबा है
EK EHSAAS MUJHE MEHV KIYE REHTA HAI
IK KHAYAALON KE SAMANDAR MEN YE DIL DOOBA HAI

है तलबगार समंदर की मेरी तश्नालबी
होंठ तो होंठ, मेरी रूह तलक तश्ना है
HAI TALABGAAR SAMANDAR KI MERI TASHNALABI
HONT TO HONT MERI ROOH TALAK TASHNA HAI

इस उजाले ने तो बीनाई ही ले ली मेरी
मैं ने सदियों से उजाला जो नहीं देखा है
IS UJAALE NE TO BEENAAI HI LE LI MERI
MAIN NE SADIYON SE UJAALA JO NAHIN DEKHA HAI

कैसा आसेब मेरे दिल को लगा है अबके
कैसा जादू है, अजब दिल पे नशा छाया है
KAISA AASEB MERE DIL KO LAGA HAI AB KE
KAISA JAADU HAI, AJAB DIL PE NASHA CHHAYA HAI

एक एहसास जो लिपटा है मेरी रूह के साथ
मेरी हस्ती से मुझे दूर लिए जाता है
EK EHSSAS JO LIPTA HAI MERI ROOH KE SAATH
MERI HASTI SE MUJHE DOOR LIYE JAATA HAI

आज मुमताज़ ने डाली है हवाओं पे कमंद
पैरहन जिस्म का तख़ईल को पहनाया है
AAJ 'MUMTAZ' NE DAALI HAI HAWAAON PE KAMAND
PAIRAHAN JISM KA TAKHEEL KO PEHNAYA HAI


महव गुम, तश्नालबी प्यास, तश्ना प्यासी, बीनाई प्यास, आसेब प्रेतबाधा, कमंद किसी ऊंची जगह पर चढ़ने की रस्सी, पैरहन लिबास, तख़ईल कल्पना 

टिप्पणियाँ

  1. यूँ खो गए हम नयनो में तुम्हारे ........दिल भी हारे जां भी हारे..

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  2. 'Is ujale...' sher is gazal ka sab se badhiya sher laga aur makta bhee zabardast hai. Par samandar lafz baar baar aaya hai. Overall achchee gazal.

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