हम्द (hamd) मेरे अश्कों से उलझती रहे आक़ाई तेरी

मेरे अश्कों से उलझती रहे आक़ाई तेरी
मैं किसी और से माँगूँ तो है रुस्वाई तेरी
mere ashkon se ulajhti rahe aaqaai teri
main kisi aur se maangun to hai ruswaai teri

फूल में, कलियों में, ख़ुर्शीद-ओ-क़मर में, हर सू
ज़र्रे ज़र्रे में महक मुझको नज़र आई तेरी
phool men kaliyon men khursheed-o-qamar men har soo
zarre zarre men jhalak mujh ko nazar aai teri

बन के तूफ़ान समंदर से चला क़हर तेरा
बाइस-ए-रक़्स-ए-ज़मीं बन गई अंगड़ाई तेरी
ban ke toofaan samandar se chala qahr tera
baais-e-raqs-e-zameen ban gai angdaai teri

धड़कनें होती हैं हर पल तेरे जल्वों पे निसार
एक इक शय में नज़र आती है रानाई तेरी
dhadkanen hoti hain har pal tere jalwon pe nisaar
ek ik shay men nazar aati hai raanaai teri

रूह बीमार है, दिल नालाँ है, बदज़न है ख़याल
कैसी मंज़िल पे मुझे जुस्तजू ले आई तेरी
rooh beemaar hai dil naalaan hai badzan hai khayaal
kaisi manzil pe mujhe justju le aai teri

हर तसव्वर से, तफ़क्कुर से, तजस्सुस से परे
जुस्तजू थक गई, मिलती नहीं गहराई तेरी
har tasawwar se tafakkur se tajassus se pare
justju thak gai milti nahin gahraai teri

है मोहब्बत मेरी ज़ख़्मी तो इबादत है उदास
अब संभाले तो संभाले मुझे आक़ाई तेरी
hai mohabbat meri zakhmee to ibaadat hai udaas
ab sambhaale to sambhaale mujhe aaqaai teri

तू मेरे दिल में रहा पर मुझे अब तक न मिला
आज तक रहती है "मुमताज़" तमन्नाई तेरी
 tu mere dil men raha par mujhe ab tak na mila
aaj tak rahti hai 'mumtaz' tamannai teri

आक़ाई - मलिकियत, रुस्वाई - बदनामी, ख़ुर्शीद - सूरज, क़मर - चाँद, ज़र्रे ज़र्रे में - कण कण में,
क़हर - ग़ुस्सा, बाइस - कारण, रक़्स - नृत्य, रानाई - सुंदरता, नालाँ - रोता हुआ, बदज़न - शक्की,
जुस्तजू - तलाश, तसव्वर - कल्पना, तफ़क्कुर - सोच, तजस्सुस - खोज, तमन्नाई - इच्छुक 

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