कर्ब ए नारसाई


मोहब्बत  ती  जाती  है
अज़ीअत  ती  जाती  है

अभी  तक  तो
मेरी  आँखों  में
तेरा  अक्स  उतरा  था
अभी  तक
मेरी  महसूसात  का
ये  दिल  ही
क़ैदी  था
लहू  रौशन  था
रग  रग  का
अभी  तक
लम्स  की  ज़ौ  से
अभी 
जज़्बा
तेरी  बेसाख्ता  जुरअत  का
आदी  था
मगर  अब
रफ़्ता  रफ़्ता
रूह
क़ैदी  होती  जाती  है
मेरी  हस्ती
जहान    यास  में
अब  खोती  जाती  है
मेरे  जज़्बात  की  दुनिया  में
ये  सैलाब  है  कैसा
मेरी  बेताब  आँखों  में
  जाने  ख़्वाब  है  कैसा
नशीले  ख़्वाब  में
पिन्हाँ
अजब  सी 
बेक़रारी  है
मेरे  जज़्बात
आँखों  से
टपक  जाने  के  ख़्वाहाँ  हैं
इसी  सैलाब  में
दिल  डूबा  जाता  है
  जाने  क्यूँ
तसव्वर  रेज़ा  रेज़ा
हसरतें  भी
हैराँ  हैराँ  हैं
  जाने  कौन  सी 
मंज़िल  की  जानिब
गामज़न  हूँ  मैं
अज़ीअत- तकलीफ, महसूसात – feelings, लम्स – स्पर्श, ज़ौ – किरण, जहान  ए  यास – उदासी की दुनिया, पिन्हाँ – छुपी हुई, ख़्वाहाँ – इच्छा रखने वाले, तसव्वर- कल्पना, रेज़ा रेज़ा – टुकड़े टुकड़े, गामज़न – चल रही
م
حبت بڑھتی جاتی ہے

عذیئت بڑھتی جاتی ہے

ابھی تک تو مری آنکھوں میں تیرا اکس اترا تھا

ابھی تک میری محسوسات کا یہ دل ہی قیدی تھا

لہو روشن تھا رگ رگ کا ابھی تک لمس کی ضو سے

ابھی جذبہ تری بےساختہ جرات کا عادی تھا

مگر اب رفتہ رفتہ روح قیدی ہوتی جاتی ہے

مری ہستی جہانِ یاس میں اب کھوتی جاتی ہے

مرے جذبات کی دنیا میں یہ سیلاب کیسا ہے

مری بیتاب آنکھوں میں نہ جانے خواب کیسا ہے

نشیلے خواب میں پنہاں اجب سی بیقراری ہے

مرے جذبات آنکھوں سے ٹپک پڑنے کے خواہاں ہیں

اسی سیلاب میں دل ڈوبا جاتا ہے نہ جانے کیوں

تصور ریزہ ریزہ حسرتیں بھی حیراں حیراں ہیں

نہ جانے کون سی منزل کی جانب گامزن ہوں میں

 



Comments

Popular posts from this blog

फ़र्श था मख़मल का, लेकिन तीलियाँ फ़ौलाद की

भड़कना, कांपना, शो'ले उगलना सीख जाएगा

किरदार-ए-फ़न, उलूम के पैकर भी आयेंगे