डर तो है तुन्द हवा से, प जताते भी नहीं


डर तो है तुन्द हवा से, प जताते भी नहीं
हम चराग़ों को सर ए राह जलाते भी नहीं

हैं सख़ी आप, मगर ये तो मोहब्बत है जनाब
ये ख़ज़ाना तो सर-ए-आम लुटाते भी नहीं

हम को यादों का क़फ़स भी नहीं मंज़ूर, मगर
नाम लिखा है जो दिल पर, वो मिटाते भी नहीं

अपने ही पास रखें आप इनायत अपनी
हम तो कमज़र्फ़ों का एहसान उठाते भी नहीं

मसनूई चीज़ों से हम को है अदावत क्या क्या
काग़ज़ी फूलों को हम घर में सजाते भी नहीं

यूँ तो "मुमताज़" मुझे याद है हर बात मगर
अब वो लम्हात मेरे दिल को दुखाते भी नहीं
dar to hai tund hawaa se, pa jataate bhi nahiN
ham charaaghoN ko sar e raah jalaate bhi nahiN

haiN sakhi aap, magar ye to mohabbat hai janaab
ye khazaana to sar e aam lutaate bhi nahiN

ham ko yaadoN ka qafas bhi nahiN manzoor magar
naam likkha hai jo dil par, wo mitaate bhi nahiN

apne hi paas rakheN aap inaayat apni
ham to kamzarfoN ka ehsaan uthaate bhi nahiN

masnooi cheezoN se ham ko hai adaawat kya kya
kaaghzi phooloN ko ham ghar meN sajaate bhi nahiN

yuN to "Mumtaz" mujhe yaad hai har baat magar
ab wo lamhaat mere dil ko dukhaate bhi nahiN

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