कैश की शक्ल में आए जो, वो माल अच्छा है


कैश की शक्ल में आए जो, वो माल अच्छा है
ख़्वाह दीनार-ओ-दिरहम हो, कि रियाल, अच्छा है

ख़्वाह हो वोट की खातिर, प कोई काम तो हो
डेमोक्रेसी में इलेक्शन का ही साल अच्छा है

पहले शायर थे अलग, और गवय्ये थे अलग
बन गए आज तो शायर ही क़वाल, अच्छा है

पहले नाकर्दा गुनाहों की सज़ा दी, और अब
प्रेस के सामने करते हैं मलाल, अच्छा है

ज़िन्दगी चैन से मरने नहीं देती हम को
और कर रक्खा है जीना भी मुहाल, अच्छा है

एक बेचैनी सी दिन रात रहा करती है
मेरे सर पर ये मोहब्बत का वबाल अच्छा है

मेरे हाथों से न सरज़द हो कोई कार ए हराम
दो निवाले हों, मगर रिज्क़ ए हलाल अच्छा है

दिल में चुभती हैं तो जी उठते हैं अरमान कई
उन की आँखों में ये पुरलुत्फ़ कमाल अच्छा है

cash ki shakl meN aae jo, wo maal achha hai
khwaah dinaar o dirham ho, ke riyaal, achha hai

khwaah ho vote ki khaatir, pa koi kaam to ho
democracy meN election ka hi saal achha hai

pahle shaayar the alag, aur gavayye the alag
ban gae aaj to shaayar hi qawal, achha hai

pahle nakarda gunaahoN ki sazaa di, aur ab
press ke saamne karte haiN malaal, achha hai

zindagi chain se marne nahiN deti ham ko
aur kar rakkha hai jeena bhi muhaal, achha hai

ek bechaini si din raat raha karti hai
mere sar par ye mohabbat ka vabaal achha hai

mere haathoN se na sarzad ho koi kaar e haraam
do nivaale hoN, magar rizq e halaal achha hai

dil meN chubhti haiN to jee uthte haiN armaan kai
un ki aankhoN meN ye purlutf kamaal achha hai


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