इक यही आख़िरी हक़ीक़त है


इक यही आख़िरी हक़ीक़त है
तेरी उल्फ़त मेरी इबादत है

जान-ए-जाँ ये भी इक हक़ीक़त है
मुझ को तेरी बहुत ज़रुरत है

लूट का फ़न तवील क़ामत है
आजकल आदमी की क़िल्लत है

फ़ौत होने लगी है तारीकी
एक उम्मीद की विलादत है

मुझ को रखता है इक तज़बज़ुब में
ये मेरे क़ल्ब की शरारत है

छोटी छोटी हज़ार ख़ुशियाँ हैं
इश्क़ में भी बड़ी नफ़ासत है

खो गया जब क़रार तो जाना
बेक़रारी में कितनी लज़्ज़त है

जीतना, मुस्कराना, ख़ुश रहना
ऐश में भी बड़ी मशक़्क़त है

अब हवस का ही खेल है सारा
"अब मोहब्बत कहाँ मोहब्बत है"

ज़िन्दगी जिस को हम समझते हैं
सिर्फ़ "मुमताज़" एक साअत है  


ik yahi aakhiri haqeeqat hai
teri ulfat meri ibaadat hai

jaan e jaaN ye bhi ik haqeeqat hai
mujh ko teri bahot zaroorat hai

loot ka fan taweel qaamat hai
aaj kal aadmi ki qillat hai

faut hone lagi hai taariki
ek ummeed ki wilaadat hai

mujh ko rakhta hai ik tazabzub meN
ye mere qalb ki sharaarat hai

chhoti chhoti hazaar khushiyaaN haiN
ishq meN bhi badi nafaasat hai

kho gaya jab qaraar, to jaana
beqaraari meN kitni lazzat hai

jeetna, muskraana, khush rehna
aish meN bhi badi mashaqqat hai

ab hawas ka hi khel hai saara
"ab muhabbat kahaN mohabbat hai"

zindagi jis ko ham samajhte haiN
sirf "Mumtaz" ek saa'at hai

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