ये कैसा दर्द है


ये कैसा दर्द है कैसी कसक है
ये क्यूँ हर  पल  तेरी  यादें
मुझे बेचैन रखती हैं
तेरी आँखें मेरे दिल पर
वफ़ा का नाम लिखती हैं
ये उल्फ़त की तपक है

मेरे राहतकदे  में
क्यूँ ये उलझन बढती जाती है
ये कैसा राब्ता है
तेरे एहसास का इस दर्द से 
क्यूँ चुभ रही हैं
तेरी साँसें
मेरे चेहरे पर
ख़यालों की धनक है

मेरी हस्ती
कहाँ गुम होती जाती है
अना ख़ामोश क्यूँ है
ये जुनूँ को क्या हुआ
ज़िद क्यूँ हेरासाँ है
ये धड़कन क्यूँ परेशाँ है
ये किस शय की खनक है

राब्ता-सम्बन्ध, धनक-इंद्र्धनुष, अना-अहम्, जुनूँ-दीवानगी, हेरासाँ-डरी हुई

یہ کیسا درد ہے کیسی کسک ہے
یہ کیوں ہر پل تری یادیں
مجھے بے چین رکھتی ہیں
تری آنکھیں مرے دل پر
وفا کا نام لکھتی ہیں
یہ الفت کی تپک ہے

مرے راحت کدے میں کیوں یہ الجھن بڑھتی جاتی ہے
یہ کیسا رابطہ ہے
ترے احساس کا اس درد سے
کیوں چبھ رہی ہیں تیری سانسیں میرے چہرے پر
خیالوں کی دھنک ہے

مری ہستی کہاں گم ہوتی جاتی ہے
انا خاموش کیوں ہے
یہ جنوں کو کیا ہوا
ضد کیوں ہراساں ہے
یہ دھڑکن کیوں پریشاں ہے
یہ کس شے کی کھنک ہے

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