बेज़ारी की बर्फ़ पिघलना मुश्किल है


बेज़ारी  की  बर्फ़  पिघलना  मुश्किल  है 
ख़्वाबों  से  दिल  आज  बहलना  मुश्किल  है

तुन्द हवाओं  से  लर्ज़ाँ  है  शम्म-ए-यक़ीं 
इस  आंधी  में  दीप  ये  जलना  मुश्किल  है

हर  जानिब  है  आग, सफ़र  दुशवार  है  अब
जलती  है  ये  राह, कि चलना  मुश्किल  है

आग  की  बारिश, ख़ौफ़ के  दरिया  का  सैलाब
इस  मौसम  में  घर  से  निकलना  मुश्किल  है

गर्म  है  क़त्ल    ग़ारत का  बाज़ार  अभी
ये  जाँ  का  जंजाल  तो  टलना  मुश्किल  है

उल्फ़त  की  अब  छाँव  तलाश  करो  यारो
नफ़रत  का  ख़ुर्शीद  तो  ढलना  मुश्किल  है

ताक़त  जिस  की  राज  उसी  का  चलता  है
"जंगल  का  क़ानून  बदलना  मुश्किल  है"

अंधी  खाई  है  आगे    हम  वतनो      
फिसले  तो  "मुमताज़" संभलना मुश्किल  है 

bezaari ki barf pighalna mushkil hai
khwaaboN se dil aaj bahlna mushkil hai

tund hawaaoN se larzaaN hai sham e yaqeeN
is aandhi meN deep ye jalna mushkil hai

har jaanib hai aag, safar dushwaar hai ab
jalti hai ye raah, ke chalna mushkil hai

aag ki baarish, khauf ke dariya ka sailaab
is mausam meN ghar se nikalna mushkil hai

garm hai qatl o ghaarat ka baazar abhi
ye jaaN ka janjaal to talna mushkil hai

ulfat ki ab chhaanv talaash karo yaaro
nafrat ka khursheed to dhalna mushkil hai

taaqat jis ki raaj usi ka chalta hai
jangal ka qaanoon badalna mushkil hai

andhi khaai hai aage ae ham watno
phisle to "Mumtaz" sambhalna mushkil hai

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