नफ़रतों का ये नगर मिस्मार होना चाहिए


नफ़रतों का ये नगर मिस्मार होना चाहिए
अब मोहब्बत का खुला इज़हार होना चाहिए

एकता की कश्तियाँ मज़बूत कर लो साथियो
अब त'अस्सुब का ये दरिया पार होना चाहिए

टूटे मुरझाए दिलों को प्यार से सींचो, कि अब
रूह का रेग ए रवाँ गुलज़ार होना चाहिए

मुल्क देता है सदा, ऐ मेरे हमवतनो, उठो
सो लिए काफ़ी, बस अब बेदार होना चाहिए

खौफ़ का सूरज ढले, सब के दिलों में हो यक़ीं
है नहीं, लेकिन ये अब ऐ यार, होना चाहिए

कब तलक "मुमताज़" बेजा हरकतों का इत्तेबाअ
हर सदा पर हाँ ? कभी इनकार होना चाहिए

nafratoN ka ye nagar mismaar hona chaaiye
ab mohabbat ka khula izhaar hona chaahiye

zulmaton ka ye safar hamwaar hona chaahiye
"aadmi ko aadmi se pyar hona chaahiye"

ekta ki kashtiyaaN mazboot kar lo dosto
ab ta'assub ka ye dariya paar hona chaahiye

toote murjhaae diloN ko pyaar se seencho, ki ab
rooh ka reg e rawaaN gulzaar hona chaahiye

mulk deta hai sadaa, ae mere hamwatno, utho
so liye kaafi, bas ab bedaar hona chaahiye

khauf ka sooraj dhale, sab ke diloN meN ho yaqeeN
hai nahiN, lekin ye ab ae yaar, hona chaahiye

kab talak "Mumtaz" bejaa harkatoN ka ittebaa
har sadaa par haaN? kabhi inkaar hona chaahiye

Comments

Popular posts from this blog

चलन ज़माने के ऐ यार इख़्तियार न कर

किरदार-ए-फ़न, उलूम के पैकर भी आयेंगे

हमारे बीच पहले एक याराना भी होता था