ख़ंजर हैं तअस्सुब के, और खून की होली है


ख़ंजर हैं  तअस्सुब  के, और  खून की  होली  है
हम  ने  ये  विरासत  अब  औलाद  को  सौंपी  है

तारीक  बयाबाँ  में  ये  कैसी  तजल्ली  है
ये  दिल  की  सियाही  में  क्या  शय  है  जो  जलती  है

जो  हारे  वो  पा  जाए, ये  इश्क़  की  बाज़ी  है
जब  ख़ुद  को  गंवाया  है, तब  जंग  ये  जीती  है

है  दूर  अभी  साहिल, तय  हो  तो  सफ़र  कैसे
रूठा  हुआ  मांझी  है, टूटी  हुई  कश्ती  है

बेताब  जुनूँ  का  ये  अदना  सा  करिश्मा  है
देहलीज़  पे  हसरत  की  तक़दीर  सवाली  है

देखा  जो  ज़रा  मुड़  के, पथरा  गई  बीनाई
माज़ी  से  मुझे  किसने  आवाज़  अभी  दी  है

नाकाम  तमन्ना  ने  परवाज़  को  पर  खोले
रौनक़  है  ख़यालों  में, अंदाज़  में  शोख़ी  है

क्या  दे  के  मिलेगा  क्या, ये  शर्त  नहीं  चलती
ब्यौपार  नहीं  साहब, ये  बात  तो  दिल  की  है

इन्सां  की  ज़रुरत  का  सामान  हुआ  महंगा
इंसान  हुआ  सस्ता, ये  दौर    तरक़्क़ी  है

सब  को  है  नशा  अपना, फिर  हम  से  शिकायत  क्यूँ
"हंगामा  है  क्यूँ  बरपा  थोड़ी  सी  जो  पी  ली  है"

"मुमताज़" न  क्यूँ  मानें  एहसान  तबीबों  का
मरती  हुई  हसरत  में  कुछ  जान  तो  बाक़ी  है

khanjar haiN taassub ke, aur khoon ki holi hai
ham ne ye viraasat ab aulaad ko saunpi hai

taarik bayaabaaN meN ye kaisi tajalli hai
ye dil ki siyaahi meN kya shay hai jo jalti hai

jo haare wo paa jaae, ye ishq ki baazi hai
jab khud ko ganvaaya hai, tab jang ye jeeti hai

hai door abhi saahil, tay ho to safar kaise
rootha hua maanjhi hai, tooti hui kashti hai

betaab junooN ka ye adna sa karishma hai
dehleez pe hasrat ki taqdeer sawaali hai

dekha jo zara mud ke, pathra gai beenaai
maazi se mujhe kisne aawaaz abhi di hai

naakaam tamanna ne parwaaz ko par khole
raunaq hai khayaaloN meN, andaaz meN shokhi hai

kya de ke milega kya, ye shart nahiN chalti
byoupaar nahiN saahab, ye baat to dil ki hai

insaaN ki zaroorat ka saamaan hua mahnga
insaan hua sasta, ye daur e taraqqi hai

sab ko hai nasha apna, phir ham se shikaayat kyuN
hangaama hai kyuN barpaa thodi si jo pee li hai

"Mumtaz" na kyuN maaneN ehsaan tabeeboN ka
marti hui hasrat meN kuchh jaan to baaqi hai

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