नूर अपना मेरी हस्ती में ज़रा हल कर दे


नूर  अपना  मेरी  हस्ती  में  ज़रा  हल  कर  दे
इक  ज़रा  हाथ  लगा  दे, मुझे  संदल  कर  दे

ज़ेर-ओ-बम  राह  के  चलने  नहीं  देते  मुझ  को
तू  जो  चाहे  तो  हर  इक  राह  को  समतल  कर  दे

यूँ  तो  हर  वक़्त  चुभा  करती  है  इक  याद  मुझे
शाम  आए  तो  मुझे  और  भी  बेकल  कर  दे

तेरे  शायान-ए-ख़ुदाई  हों  अताएँ  तेरी
सारी  महरूमी  को  यारब  तू  मुकफ़्फ़ल  कर  दे

ज़ुल्म  की, यास  की, बदबख्ती की, महरूमी  की
"सारी  दुनिया  को  मेरी  आँखों  से  ओझल  कर  दे"

अब    "मुमताज़" अधूरी  रहे  हसरत  कोई
मेरे  मालिक  मेरी  ख़ुशियों को  मुकम्मल  कर  दे

noor apna meri hasti meN zara hal kar de
ik zara haath laga de, mujhe sandal kar de

zer o bam raah ke chalne nahiN dete mujh ko
tu jo chaahe to har ik raah ko samtal kar de

yuN to har waqt chubha karti hai ik yaad mujhe
shaam aae to mujhe aur bhi bekal kar de

tere shaayan e khudaai hoN ataaeN teri
saari mahroomi ko yaarab tu mukaffal kar de

zulm ki, yaas ki, badbakhti ki, mahroomi ki
"saari duniya ko meri aankhoN se ojhal kar de"

ab na "mumtaz" adhoori rahe hasrat koi
mere maalik meri khushiyoN ko mukammal kar de

Comments

Popular posts from this blog

चलन ज़माने के ऐ यार इख़्तियार न कर

किरदार-ए-फ़न, उलूम के पैकर भी आयेंगे

हमारे बीच पहले एक याराना भी होता था