फ़र्ज़ है, पास-ए-मोहब्बत है, वफ़ा है, शायद


फ़र्ज़ है, पास-ए-मोहब्बत है, वफ़ा है, शायद
इस अज़ीयत1 में तो कुछ और मज़ा है शायद

दिल तो कहता है कि मेरी ही ख़ता है, शायद
ज़हन कहता है कि ये खेल बड़ा है शायद

पा2-ए-क़िस्मत पे जो ग़श3 खा के गिरा है कोई
ज़िन्दगी भर के सफ़र से वो थका है शायद

जहाँ क़दमों के निशाँ हैं, वहाँ भीगी है ज़मीं
दश्त-ए-सेहरा4 में कोई आबला5 पा है शायद

धज्जियाँ जिस की फ़ज़ाओं में उडी जाती हैं
झूट के तन पे ये रिश्तों की क़बा6 है शायद

ज़र्ब7 देता है, मिटाता है, सितम ढाता है
मेरे क़ातिल को मेरा राज़ पता है शायद

खाए जाती है मेरी रूह8 की सैराबी9 को
ये शब-ए-तार10 तो मूसा का असा11 है शायद

रोज़ देता है सबक़ मुझ को नए हस्ती के
मुझ में जो बोल रहा है, वो ख़ुदा है शायद

शोर बातिन12 में शब-ओ-रोज़13 उठा करता है
ये मेरे दिल के धड़कने की सदा है शायद

रू-ए-मग़रूर14 पे लिक्खा है मेरी मात का राज़
उस ने "मुमताज़" मुझे जीत लिया है शायद

1- तकलीफ़, 2- पाँव, 3- बेहोशी, 4- रेगिस्तान का जंगल, 5- छाला, 6- लिबास, 7- चोट, 8- आत्मा, 9- भरा पूरा होना, 10- अंधेरी रात, 11- मूसा की लाठी, जिस में ये ताक़त थी कि वह ज़मीन पर फेंकने से अजगर बन जाती थी, 12- अन्तर्मन, 13- रात दिन, 14- घमंड से भरा चेहरा

farz hai, paas e mohabbat hai, wafaa hai, shaayad
is azeeyat meN to kuchh aur mazaa hai shaayad

paa e qismat pe jo ghash kha ke gira hai koi
zindagi bhar ke safar se wo thakaa hai shaayad

dil to kehta hai ke meri hi khataa hai, shaayad
zehn kehta hai ke ye khel bada hai shaayad

paa e qismat pe jo ghash kha ke gira hai koi
zindagi bhar ke safar se wo thakaa hai shaayad

jahaN qadmoN ke nishaaN haiN, wahaN bheegi hai zameeN
dasht e sehra meN koi aabla paa hai shaayad

dhajjiyaN jis ki fazaaoN meN udi jaati haiN
jhoot ke tan pe ye rishtoN ki qabaa hai shaayad

zarb deta hai, mitaata haim sitam dhaata hai
mere qaatil ko mera raaz pata hai shaayad

khaae jaati hai meri rooh ki sairaabi ko
ye shab e taar to moosa ka asaa hai shaayad

roz deta hai sabaq mujh ko nae hasti ke
mujh meN jo bol raha hai, wo khuda hai shaayad

shor baatin meN shab o roz utha karta hai
ye mere dil ke dhadakne ki sadaa hai shaayad

roo e maghroor pe likkha hai meri maat ka raaz
us ne "Mumtaz" mujhe jeet liya hai shaayad"

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