इंसाँ बेदस्तार हुआ है


इंसाँ बेदस्तार हुआ  है
ज़ख़्मी  हर  किरदार  हुआ  है

तूफ़ानों  का  वार  हुआ  है
फिर  भी  सफ़ीना  पार  हुआ  है

नादारों  की  जान  है  सस्ती
जीना  भी  ब्योपार  हुआ  है

ख़्वाबों  का  ख़ुर्शीद  तो  डूबा
दिल  आख़िर  बेदार  हुआ  है

बीनाई  सरशार  हुई  है
आज  उन  का  दीदार  हुआ  है

लम्हा  लम्हा  भाग  रहा  है
वक़्त  सुबुक  रफ़्तार  हुआ  है

कुछ  तो  है  "मुमताज़ " ने  पाया
हर  लम्हा  सरशार  हुआ  है

insaaN bedastaar hua hai
zakhmee har kirdaar hua hai

toofaanoN ka waar hua hai
phir bhi safeena paar hua hai

naadaaroN ki jaan hai sasti
jeena bhi byopaar hua hai

khwaaboN ka khursheed to dooba
dil aakhir bedaar hua hai

beenaai sarshaar hui hai
aaj un ka deedaar hua hai

lamha lamha bhaag raha hai
waqt subuk raftaar hua hai

kuchh to hai "Mumtaz" ne paaya
har lamhaa sarshaar hua hai

Comments

Popular posts from this blog

फ़र्श था मख़मल का, लेकिन तीलियाँ फ़ौलाद की

भड़कना, कांपना, शो'ले उगलना सीख जाएगा

किरदार-ए-फ़न, उलूम के पैकर भी आयेंगे