हम पर जो हैं अज़ीज़ों के एहसान मुख़्तलिफ़


हम पर जो हैं अज़ीज़ों के एहसान मुख़्तलिफ़
लगते रहे हैं हम पे भी बोहतान मुख़्तलिफ़

हर एक रहनुमा का है ऐलान मुख़्तलिफ़
हैं मसलेहत के थाल में ग़लतान मुख़्तलिफ़

बिखरे हुए हैं ज़ीस्त के हैजान मुख़्तलिफ़
टुकड़ों में दिल के रहते हैं अरमान मुख़्तलिफ़

होगा क़दम क़दम पे इरादों का इम्तेहाँ
इस रास्ते में आएँगे बोहरान मुख़्तलिफ़

खुलते रहे हयात के हर एक मोड़ पर
तक़दीर की किताब के उनवान मुख़्तलिफ़

इस्लाम आज कितने ही ख़ानों में बँट गया
मसलक जुदा जुदा हुए, ईमान मुख़्तलिफ़

ये और बात, हारा नहीं हम ने हौसला
गुजरे हमारी राह से तूफ़ान मुख़्तलिफ़

धोका छलावा ज़ख़्मी अना और शिकस्ता दिल
“मुमताज़” हैं ख़ुलूस के नुक़सान मुख़्तलिफ़

मुख़्तलिफ़ – अलग अलग, बोहतान – झूठा इल्ज़ाम, रहनुमा – लीडर, मसलेहत – पॉलिसी, ग़लतान – लुढ़कने वाला, ज़ीस्त – ज़िन्दगी, हैजान – जोश, बोहरान – अड़चन, हयात – ज़िन्दगी, उनवान – शीर्षक, मसलक – रास्ता, तरीका, अना – अहं, ख़ुलूस – सच्चाई


ham par jo hain azizoN ke ehsaan mukhtalif
lagte rahe haiN ham pe bhi bohtaan mukhtalif

har ek rahnuma ka hai ailaan mukhtalif
haiN maslehat ke thaal meN ghaltaan mukhtalif

bikhre hue haiN zeest ke haijaan mukhtalif
tukdon meN dil ke rahte haiN armaan mukhtalif

hoga qadam qadam pe iraadoN ka imtehaaN
is raaste meN aaenge bohraan mukhtalif

khulte rahe hayaat ke har ek mod par
taqdeer kee kitaab ke unwaan mukhtalif

islam aaj kitne hi khaanoN meN bant gaya
maslak juda juda hue, imaan mukhtalif

ye aur baat haara nahin ham ne hausla
guzre hamaari raah se toofaan mukhtalif

dhoka, chhalaava, zakhmi anaa aur shikasta dil
"Mumtaz" hain khuloos ke nuqsaan mukhtalif

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